जमशेदपुर: आखिरकार 50 दिनों से चल रही आवाज़ रंग लाई। टाटानगर से गुजरने वाली ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी को लेकर छेड़ी गई लड़ाई में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय को बड़ी सफलता मिली है। लंबे आंदोलन, धरना और रेलवे अधिकारियों पर लगातार दबाव के बाद रेल प्रशासन को झुकना पड़ा और यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने का अहम फैसला लेना पड़ा।
दरअसल, पिछले कई महीनों से टाटानगर और चक्रधरपुर रेल मंडल के यात्रियों को घंटों की देरी का सामना करना पड़ रहा था। लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को पहले रास्ता दिया जा रहा था, जिससे आम यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही थी।
इसी मुद्दे को लेकर सरयू राय ने आंदोलन की कमान संभाली। रेलवे स्टेशन परिसर में धरने से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेने लगा। लगातार विरोध और जनदबाव के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन के साथ हुई अहम बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान सरयू राय ने रेलवे अधिकारियों के सामने साफ शब्दों में कहा कि यात्रियों की सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने निर्देश जारी किया कि मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के ऊपर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी और ट्रेनों की लेटलतीफी पर निगरानी रखने के लिए विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।
इस फैसले से रोज़ाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर नौकरीपेशा लोग, छात्र और दूर-दराज़ से आने-जाने वाले यात्री लंबे समय से इस समस्या से परेशान थे।
राजनीतिक गलियारों में भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा तेज है। समर्थकों का कहना है कि सरयू राय ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यदि किसी मुद्दे को मजबूती से उठाया जाए तो उसका समाधान निकल सकता है। वहीं आम यात्रियों के बीच भी इस फैसले को लेकर संतोष और उम्मीद का माहौल देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि रेलवे प्रशासन अपने वादों को जमीन पर कितनी तेजी और गंभीरता से लागू करता है। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि टाटानगर के यात्रियों की आवाज़ अब रेलवे के गलियारों तक मजबूती से पहुंच चुकी है।