कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस आलाकमान नई सरकार के गठन को लेकर लगातार बैठकों में जुटा हुआ है और अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि राज्य में कितने उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी दो से तीन डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने के फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए यह रणनीति अपना सकती है। दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से नेताओं को डिप्टी CM पद देने की चर्चा जोरों पर है। वहीं, डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
दिल्ली में हुई बैठकों के बाद अब बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच सरकार और कैबिनेट को लेकर लगातार मंथन जारी है। पार्टी नए और युवा चेहरों को भी सरकार में मौका देने के मूड में दिखाई दे रही है।
डिप्टी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में यूटी खादर, प्रियंक खड़गे और एमबी पाटिल जैसे बड़े नाम सामने आ रहे हैं। इसके अलावा केजे जॉर्ज, रामलिंगा रेड्डी, कृष्णा बायरे गौड़ा और जी परमेश्वर समेत कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। सतीश जारकीहोली का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, लेकिन पार्टी इस बात पर भी विचार कर रही है कि संगठन और सरकार की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को दी जाए ताकि आगामी चुनावों की तैयारी मजबूत हो सके।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार गठन से पहले ही दिल्ली में विधायकों की आवाजाही बढ़ गई है। हर नेता कैबिनेट में जगह बनाने के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
अब सबकी नजर 3 जून पर टिकी है, जब नई सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है। क्या कांग्रेस का यह नया सत्ता संतुलन पार्टी को मजबूती देगा या अंदरूनी खींचतान बढ़ाएगा — इसका जवाब आने वाला समय देगा।