“अचानक जेल पहुंचे DC राजीव रंजन! कैदियों से की सीधी बातचीत, बाल सुधार गृह में भी लिया व्यवस्था का जायजा”
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन ने गुरुवार को अचानक घाघीडीह सेंट्रल जेल और साकची स्थित ऑब्जर्वेशन होम (बाल सुधार गृह) का निरीक्षण कर प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी। इस दौरान उन्होंने सिर्फ फाइलों और रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सीधे कैदियों और बच्चों से बातचीत कर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की।
कैदियों से सीधे पूछा हाल-चाल
निरीक्षण की सबसे खास बात यह रही कि डीसी राजीव रंजन ने कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उन्होंने जेल में मिलने वाली सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। प्रशासन का उद्देश्य यह समझना था कि कागजों पर दर्ज व्यवस्थाएं वास्तव में धरातल पर कितनी प्रभावी हैं।
सूत्रों के अनुसार, उपायुक्त ने जेल प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि सुधारात्मक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाए, ताकि सजा पूरी होने के बाद बंदी समाज की मुख्यधारा में बेहतर तरीके से लौट सकें।
बाल सुधार गृह में बच्चों की सुविधाओं पर विशेष जोर
इसके बाद डीसी साकची स्थित ऑब्जर्वेशन होम पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों के रहने, पढ़ाई, स्वास्थ्य और काउंसलिंग से जुड़ी सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान शिक्षा, खेलकूद और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सुनिश्चित करने को कहा कि बच्चों को पुनर्वास और व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर मिलें।
व्यवस्था सुधारने का संदेश
प्रशासनिक हलकों में इस निरीक्षण को केवल औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अचानक हुए इस निरीक्षण से अधिकारियों को यह संदेश भी गया कि प्रशासन अब जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी को लेकर गंभीर है।
जेल और बाल सुधार गृह जैसी संवेदनशील संस्थाओं में व्यवस्थाओं की गुणवत्ता सीधे मानवाधिकार, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी होती है। ऐसे में डीसी का यह दौरा आने वाले दिनों में कई सकारात्मक बदलावों की शुरुआत साबित हो सकता है।
नजर अब कार्रवाई पर
निरीक्षण के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि उपायुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों पर कितनी तेजी से अमल होता है। यदि कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो इससे न सिर्फ बंदियों बल्कि बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों को भी बेहतर माहौल मिल सकेगा।
