झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। जादू-टोना करने के शक में 55 वर्षीय महिला की कथित तौर पर हत्या कर दी गई और शव को जंगल की खाई में फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
मृतका की पहचान चांदू पुर्ती के रूप में हुई है, जो बाईबेड़ा गांव की रहने वाली थीं। पुलिस के अनुसार, महिला की हत्या धारदार हथियार से गला रेतकर की गई। हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत छिपाने के लिए शव को घर से कुछ दूरी पर जंगल में फेंक दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब ग्रामीणों को जंगल की ओर से तेज दुर्गंध आने लगी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
जांच के दौरान पुलिस ने प्रेमजीत बानरा नामक युवक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसकी पत्नी लंबे समय से बीमार थी और उसे शक था कि महिला जादू-टोना कर रही है। इसी अंधविश्वास के चलते उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में अब भी मौजूद खतरनाक अंधविश्वास की तस्वीर दिखाती है। तकनीक और आधुनिकता के दौर में भी कई इलाकों में बीमारी, दुर्भाग्य या पारिवारिक समस्याओं का कारण जादू-टोना को माना जाता है, जिसका नतीजा कई बार निर्दोष लोगों की जान तक ले लेता है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं इस घटना ने पूरे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ कानून नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक बदलाव भी बेहद जरूरी है। क्योंकि जब अंधविश्वास सोच पर हावी हो जाता है, तब इंसान और इंसानियत दोनों हार जाते हैं।