अंग्रेजों के ‘Gymkhana’ से मोदी सरकार की टक्कर! आखिर क्यों छिड़ी दिल्ली के सबसे एलीट क्लब पर जंग?
दिल्ली का मशहूर और 100 साल से भी पुराना “Delhi Gymkhana Club” अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।कारण? केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक जमीन खाली करने का आदेश दे दिया है। अब इस फैसले ने सिर्फ कानूनी लड़ाई ही नहीं, बल्कि “एलीट बनाम आम जनता” की बहस भी छेड़ दी है।लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये Gymkhana है क्या… और इस क्लब को लेकर इतना हंगामा क्यों हो रहा है?
Gymkhana शब्द अंग्रेजों के दौर से जुड़ा हुआ है।ब्रिटिश शासन के दौरान ऐसे क्लब बनाए गए थे जहां बड़े अफसर, सेना अधिकारी और अमीर लोग खेल, पार्टियां और नेटवर्किंग किया करते थे।दिल्ली Gymkhana Club भी उन्हीं में से एक है।1913 में बना यह क्लब आज भी देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है। यहां सदस्यता पाना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं मानी जाती।
सरकार ने क्यों भेजा खाली करने का नोटिस?
केंद्र सरकार का कहना है कि जिस जमीन पर यह क्लब बना है, वह बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में आती है।सरकार अब इस जमीन का इस्तेमाल “Defence Infrastructure” और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए करना चाहती है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्लब 27 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर बना है और बेहद कम किराया देता है। इसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटे लोग
कुछ लोग सरकार के फैसले को सही बता रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी कीमती सरकारी जमीन पर सिर्फ चुनिंदा अमीर और प्रभावशाली लोगों का कब्जा नहीं होना चाहिए।वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे दिल्ली की विरासत और इतिहास पर हमला बता रहे हैं।पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी समेत कई लोगों ने कहा कि यह सिर्फ क्लब नहीं, बल्कि राजधानी की ऐतिहासिक पहचान है।
आखिर आगे क्या होगा?
अब मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है।क्लब के सदस्य और कर्मचारी सरकार के फैसले को चुनौती दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि दिल्ली का यह ऐतिहासिक Gymkhana बच पाएगा या इतिहास बन जाएगा।लेकिन एक बात तय है —इस बहस ने भारत में “पावर”, “प्रिविलेज” और “पब्लिक स्पेस” को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
