बारिश का पानी बचाने वाला अनोखा कंक्रीट, मिला 20 साल का पेटेंट
पानी की बढ़ती किल्लत और भूजल स्तर में गिरावट के बीच पुणे के दो नवाचारकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो वर्षा जल को सीधे जमीन में पहुंचाने में मदद कर सकती है। राजेश राठौड़ और चक्षुद्न्या राठौड़ द्वारा विकसित हाई-परफॉर्मेंस परवियस कंक्रीट सिस्टम को भारत सरकार से 20 वर्षों के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह तकनीक बारिश और तूफानी पानी को कंक्रीट की सतह से होकर जमीन में समाने देती है, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते कंक्रीटीकरण के कारण बारिश का अधिकांश पानी नालियों के माध्यम से बहकर निकल जाता है। ऐसे में यह तकनीक पार्किंग क्षेत्रों, फुटपाथों, सार्वजनिक स्थलों और वर्षा जल संचयन परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे न केवल पानी की बर्बादी कम होगी बल्कि शहरों में जल संकट से निपटने के लिए एक टिकाऊ समाधान भी उपलब्ध होगा।
ऐसे समय में जब कई राज्यों में मानसून की देरी और जल संकट चिंता का विषय बने हुए हैं, यह नवाचार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो यह भविष्य में जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
