May 18, 2026

CBSE 12th Re-evaluation:12वीं की री-इवैल्युएशन फीस ₹100 से घटकर हुई ₹25, एक नंबर भी बढ़ा तो पूरी फीस होगी वापस!

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सर्च न्यूज: सच के साथ: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर विवाद के बाद पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियों से जुड़ी फीस को भारी स्तर पर घटा दिया है।

स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों के भारी विरोध और चिंताओं को देखते हुए यह फैसला लिया है।

नया फीस स्ट्रक्चर (नया बदलाव)

पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation Fee): किसी विशिष्ट प्रश्न की दोबारा जांच कराने की फीस को ₹100 प्रति प्रश्न से घटाकर अब केवल ₹25 प्रति प्रश्न कर दिया गया है।

उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी (Scanned Copy of Answer Sheet): अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका की डिजिटल/स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए छात्रों को पहले ₹700 प्रति विषय देने होते थे, जिसे अब घटाकर मात्र ₹100 कर दिया गया है।

अंकों का सत्यापन (Verification of Marks): टोटलिंग या छूटे हुए उत्तरों की जांच (वेरिफिकेशन) के लिए पहले ₹500 फीस तय थी, जिसे अब घटाकर ₹100 कर दिया गया है।

फीस वापसी (Refund Policy) का नियम: छात्रों के हित में इस बार सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया है कि यदि पुनर्मूल्यांकन या री-चेकिंग की प्रक्रिया के बाद छात्र का एक भी नंबर बढ़ता है, तो छात्र द्वारा जमा की गई पूरी फीस वापस (Full Refund) कर दी जाएगी

विवाद की मुख्य वजह (On-Screen Marking)

इस साल कक्षा 12वीं के मूल्यांकन के लिए लागू की गई नई डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था के बाद कुल पास प्रतिशत में 3% की गिरावट (88% से घटकर 85%) दर्ज की गई थी। कई मेधावी छात्रों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिलने के कारण छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अत्यधिक महंगी री-चेकिंग फीस को लेकर कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

शिक्षा मंत्रालय और स्कूल शिक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर पीडीएफ में बदला गया था, जिसमें से 13,000 अस्पष्ट प्रतियों की मैन्युअल चेकिंग भी कराई गई थी। छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने और मूल्यांकन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही बोर्ड को इस ऐतिहासिक फीस कटौती का निर्णय लेना पड़ा।

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