May 12, 2026

Elderly Residents Become Prime Targets of Cyber Fraud in Jamshedpur:जमशेदपुर में साइबर ठगों के निशाने पर बुजुर्ग, 54% पीड़ित वरिष्ठ नागरिक

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सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर में साइबर अपराध तेजी से गंभीर समस्या बनता जा रहा है और सबसे अधिक निशाना बुजुर्ग एवं सेवानिवृत्त लोग बन रहे हैं। शहर की साइबर सेल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगभग 54 प्रतिशत पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं।रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल शहर में करीब 600 साइबर अपराध के मामले सामने आए, जिनमें लगभग 324 मामलों में बुजुर्ग लोग शिकार बने। औसतन हर दिन पांच नए साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हो रहे हैं, जिससे डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।पुलिस और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठग अब लोगों को डर और मानसिक दबाव में डालकर ठगी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका “डिजिटल अरेस्ट” है, जिसमें अपराधी खुद को CBI, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।इसके अलावा KYC अपडेट, बैंक अकाउंट ब्लॉक होने की चेतावनी, OTP साझा करने के बहाने और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए भी लोगों को ठगा जा रहा है। कई मामलों में सेवानिवृत्त लोगों को पेंशन राशि पर भारी मुनाफे का लालच देकर नकली ट्रेडिंग ऐप्स में निवेश करवाया गया।साइबर DSP मनोज ठाकुर ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि कई लोग डिजिटल सुरक्षा के बारे में कम जानकारी रखते हैं और सरकारी अधिकारियों जैसी आवाज़ या भाषा पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इन अपराधों से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।बढ़ते मामलों को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस ने शहरभर में साइबर जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे, जहां बैंक अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ बुजुर्गों को मोबाइल सुरक्षा, फर्जी लिंक पहचानने और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने की जानकारी देंगे।पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक डिटेल या निजी जानकारी साझा न करें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही किसी मामले को निपटाने के लिए पैसे मांगती है।यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के अनुसार धोखाधड़ी के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान ठगे गए पैसे को फ्रीज करने की संभावना सबसे अधिक रहती है।शहर में बढ़ते साइबर अपराधों ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के बीच साइबर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया है।

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