June 22, 2026

एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार ने शवों को अमानवीय बनाया, इंटरनेट ने उनके साथ भी वही किया

8v2phtv4_sejal-pawar-_625x300_22_June_26

मुंबई के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार एक वायरल वीडियो के बाद देशभर में चर्चा का विषय बन गई हैं। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रनीत मोरे के एक शो के दौरान उन्होंने कैडेवर (शरीर दान करने वाले मृत व्यक्ति) से जुड़े अनुभव पर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे कई लोगों ने असंवेदनशील और चिकित्सा पेशे की गरिमा के खिलाफ बताया। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया।

विवाद बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सेजल पवार को 15 दिनों की अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया, जबकि महाराष्ट्र साइबर ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। मेडिकल समुदाय के कई विशेषज्ञों ने कहा कि कैडेवर केवल अध्ययन का साधन नहीं होते, बल्कि वे ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने चिकित्सा शिक्षा और समाज के हित में अपना शरीर दान किया होता है। ऐसे में उनके प्रति सम्मान और संवेदनशीलता चिकित्सा प्रशिक्षण का मूल हिस्सा माना जाता है।

हालांकि मामला केवल छात्रा की टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ तीखी आलोचना के साथ-साथ निजी जीवन में दखल, अभद्र टिप्पणियां, चरित्र हनन और धमकियों जैसी घटनाएं भी सामने आईं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बयान की आलोचना करना अलग बात है, लेकिन किसी व्यक्ति को ऑनलाइन भीड़ का निशाना बनाना और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना गंभीर चिंता का विषय है।

इस पूरे विवाद ने मेडिकल शिक्षा, पेशेवर नैतिकता और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। कई वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि छात्रा की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन सुधार और सीखने के अवसर को भी महत्व दिया जाना चाहिए। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।