June 2, 2026

Fuel Price Hike:पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमत से देश में फिर बढ़ सकती हैं महंगाई,खाद्य वस्तुओं से लेकर विनिर्मित उत्पाद तक सब कुछ हो सकता है महंगा

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सर्च न्यूज: सच के साथ: भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई (Inflation) के दबाव को एक बार फिर बढ़ा सकती हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिससे परिवहन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) लागत में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग ₹7.5 की बढ़ोतरी हो चुकी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अपने नुकसान की भरपाई के लिए आने वाले समय में ईंधन के दामों में कुल मिलाकर ₹10 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।

भारत में माल ढुलाई का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा सड़क परिवहन के माध्यम से होता है, जिसमें संचालन लागत (Operating Cost) का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन का होता है। खुदरा ईंधन की कीमतों में इस वृद्धि का सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ेगा, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होगी और आने वाले महीनों में सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ जाएंगे।

परिवहन लागत बढ़ने का सबसे गहरा और सीधा असर डेयरी उत्पाद, चाय, कॉफी, दालें, मसाले, फल, अंडे, मांस और मछली जैसी खाद्य श्रेणियों पर पड़ेगा, जो पूरी तरह से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर निर्भर हैं। इसके अलावा, कपड़ा, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी के उत्पाद और सीमेंट जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में भी इनपुट लागत बढ़ने से कोर महंगाई (Core Inflation) को नया बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) शुरुआती तौर पर इसे आपूर्ति-पक्ष का अस्थायी प्रभाव मान सकता है, लेकिन नीति निर्माताओं को घरों की मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं और परिवहन लागत के व्यापक असर पर कड़ी नजर रखनी होगी। इसके साथ ही, मानसून में देरी या अल नीनो (El Nino) की बदलती स्थितियों जैसे मौसमी जोखिम भी खाद्य मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण को और अधिक जटिल बना सकते हैं।

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