हिमाचल की सीमा तक पहुंची जमशेदपुर की बेटी! DBMS की मेघा कुमारी ने बढ़ाया झारखंड का मान, जाना भारत के आखिरी गांव का जीवन
‘विकसित वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर मेघा ने देखा सीमावर्ती भारत का अनदेखा चेहरा
देश के विभिन्न राज्यों से चुनिंदा युवाओं के बीच मेघा का चयन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन मेरा युवा भारत (MY Bharat), गृह मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
भारत के आखिरी गांव तक पहुंची झारखंड की बेटी
कार्यक्रम के दौरान मेघा कुमारी को हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने का अवसर मिला। उन्होंने चितकुल जैसे गांवों को करीब से देखा, जिसे भारत-तिब्बत सीमा पर बसे अंतिम आबाद गांवों में गिना जाता है।
यह यात्रा केवल पर्यटन नहीं थी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के जीवन, चुनौतियों और विकास की जरूरतों को समझने का एक अनोखा अवसर थी।
ITBP जवानों से मुलाकात, जाना सीमा सुरक्षा का असली मतलब
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा रहा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों से संवाद। मेघा और अन्य प्रतिभागियों ने जवानों की कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को नजदीक से देखा।
इस अनुभव ने युवाओं को यह समझने का अवसर दिया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के पीछे कितनी मेहनत और त्याग छिपा होता है।
गांवों में रहकर समझी असली भारत की तस्वीर
मेघा ने स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताया और सीमावर्ती गांवों की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से जाना। उन्होंने ग्राम सभाओं में भी हिस्सा लिया, जहां स्थानीय विकास, प्रशासन और जनभागीदारी की प्रक्रिया को समझने का मौका मिला।
इस अनुभव ने उन्हें ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं और विकास की संभावनाओं से रूबरू कराया।
युवाओं को जोड़ने की अनूठी पहल
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सीमावर्ती क्षेत्रों का भ्रमण कराना नहीं था, बल्कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक बनाना भी था। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने एक-दूसरे की संस्कृति को जाना और भारत की विविधता में एकता को महसूस किया।
झारखंड के लिए गर्व का क्षण
मेघा कुमारी की इस उपलब्धि को जमशेदपुर और पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। सीमावर्ती भारत को समझने और राष्ट्रीय एकता के संदेश को आगे बढ़ाने में उनकी भागीदारी युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।
जमशेदपुर की यह बेटी अब सिर्फ एक छात्रा नहीं, बल्कि उन युवाओं की आवाज बनकर उभरी है जो देश को किताबों से नहीं, अनुभवों से समझना चाहते हैं।
