April 18, 2026

Illegal sand mining has created environmental crisis in National Chambal Gharial Sanctuary: “चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- माफियाओं ने पैदा किया ‘पर्यावरणीय संकट’, घड़ियालों के अस्तित्व पर खतरा” 

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सर्च न्यूज: सच के साथ:

पर्यावरणीय संकट का अलर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को टिप्पणी की कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन ने “पर्यावरणीय संकट” पैदा कर दिया है और क्षेत्र में “तबाही” (havoc) मचा दी है.

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घड़ियालों पर खतरा: अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि रेत माफियाओं की गतिविधियों के कारण दुर्लभ घड़ियालों (लंबी थूथन वाले मगरमच्छ) के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं. खनन के कारण घड़ियालों को अपना स्थान बदलने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अवैध खनन नहीं रुका, तो संबंधित विभागों (वन, खनन और पुलिस) के अधिकारियों को उनकी लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

सख्त निर्देश: कोर्ट ने अवैध खनन रोकने के लिए कई निर्देश दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:प्रभावित इलाकों में हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाना.रेत ले जाने वाले सभी ट्रैक्टरों और लोडर्स में GPS ट्रैकर्स अनिवार्य करना.खनन माफिया के खिलाफ निवारक हिरासत (Preventive Detention) कानून का उपयोग करना.

अर्धसैनिक बलों की तैनाती का संकेत: कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि वे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो कोर्ट वहां अर्धसैनिक बलों (Paramilitary forces) की तैनाती का आदेश दे सकता है.

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