‘India Has Emerged as a Global Power’: Mette Frederiksen Praises India’s Rising Influence-‘भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है’: मेटे फ्रेडरिक्सन ने भारत के बढ़ते प्रभाव की प्रशंसा की
वैश्विक राजनीति और कूटनीति के बदलते दौर में भारत की बढ़ती ताकत को लेकर दुनिया के बड़े नेता लगातार अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में Mette Frederiksen ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा कि India अब केवल “मिडिल पावर” नहीं रहा, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में शामिल हो चुका है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति लगातार दर्ज करा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 19 मई को Oslo में आयोजित इंडिया-नॉर्डिक समिट के दौरान डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में फ्रेडरिकसन ने भारत की आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक भूमिका की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती विश्व व्यवस्था में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है और भारत इस दिशा में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों के बीच भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली बड़ी ताकत बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेटे फ्रेडरिकसन के बीच हुई बैठक में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, ग्रीन ट्रांजिशन, रक्षा सहयोग, सुरक्षा, तकनीक और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग और अधिक मजबूत हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और तकनीकी प्रगति ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, अंतरिक्ष मिशन और विनिर्माण क्षेत्र में भारत ने जिस तेजी से प्रगति की है, उसने उसे वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री का यह बयान भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को काफी मजबूत किया है। चाहे जी-20 की अध्यक्षता हो, जलवायु परिवर्तन पर नेतृत्व हो या वैश्विक दक्षिण की आवाज उठाने का मुद्दा — भारत ने हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है।
बैठक के दौरान ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारत और डेनमार्क पहले से ही हरित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, पवन ऊर्जा और टिकाऊ विकास को लेकर साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में अहम साबित हो सकता है।
रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने गंभीर चर्चा की। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। डेनमार्क ने भी भारत के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में रुचि दिखाई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत की प्रगति की भी काफी सराहना की गई। मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा कि भविष्य की दुनिया तकनीक और नवाचार पर आधारित होगी और भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देशों को मिलकर ऐसी तकनीकों का विकास करना चाहिए, जो मानवता के हित में हों।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान भारत की विदेश नीति की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाई दी है। यूरोप, अमेरिका, मध्य पूर्व और एशिया के कई देश अब भारत को एक विश्वसनीय और प्रभावशाली साझेदार के रूप में देख रहे हैं।
भारत-नॉर्डिक संबंधों की बात करें तो हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। नॉर्डिक देशों की कंपनियां भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं, जबकि भारत भी इन देशों की उन्नत तकनीकों और हरित विकास मॉडल से लाभ उठाना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेटे फ्रेडरिकसन का यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है। दुनिया अब भारत को केवल एक विकासशील देश के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति के रूप में देख रही है जो वैश्विक फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति और वैश्विक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दुनिया की वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच विश्वास और साझेदारी बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, ओस्लो में हुई यह बैठक और डेनमार्क की प्रधानमंत्री का बयान भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रभाव का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। आने वाले समय में भारत की भूमिका विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।