April 8, 2026

Govind Vidyalaya Founder BD Sharma Passes Away : गोविंद विद्यालय के संस्थापक डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा का निधन, शहर के शिक्षा जगत में शोक

Late Dr. Brahmdutt Sharma

Late Dr. Brahmdutt Sharma (File Photo)

Jamshedpur : लौहनगरी के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और समाजसेवी डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा का मंगलवार तड़के निधन हो गया। 85 वर्षीय डॉ. शर्मा ने भोर करीब 3:00 बजे अपने आवास ‘ब्रह्म निवास’ में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही शहर के शैक्षणिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। विशेषकर तामोलिया स्थित गोविंद विद्यालय परिवार के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी स्थापना और सिंचन में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

विद्यालय में शोकसभा, दी गई श्रद्धांजलि

डॉ. शर्मा के निधन पर गोविंद विद्यालय परिसर में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यालय की प्राचार्या, शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. शर्मा का व्यक्तित्व केवल एक प्रबंधक का नहीं, बल्कि एक प्रेरणापुंज का था। वर्ष 1960 से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे डॉ. शर्मा अपने अंतिम दिनों तक शिक्षकों का मार्गदर्शन करते रहे और उन्हें नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरित करते रहे।

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गुरु नानक स्कूल से गोविंद विद्यालय तक का सफर

डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा का शैक्षणिक सफर संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने 1960 में मानगो स्थित गुरु नानक स्कूल में एक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। अपनी कार्यकुशलता और समर्पण के बल पर वे उसी संस्थान में प्रधानाचार्य के पद तक पहुंचे। सेवानिवृत्ति के बाद, समाज को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के संकल्प के साथ उन्होंने गोविंद विद्यालय की स्थापना की। आज तामोलिया में स्थित यह विद्यालय उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है, जो हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवार रहा है।

साहित्य और समाज सेवा में विशिष्ट योगदान

शिक्षा के अलावा डॉ. शर्मा का साहित्य और सामाजिक कार्यों में भी गहरा दखल था। उन्होंने कई वर्षों तक राजस्थानी पत्रिका ‘कुरजां’ का संपादन किया और राजस्थान नवयुवक संघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में समाज की सेवा की। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया। वे न केवल एक शिक्षाविद् थे, बल्कि एक उदार दानदाता भी थे, जिन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया।

दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल

डॉ. शर्मा की कर्तव्यनिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विद्यालय की शुरुआती बाधाओं को दूर करने के लिए उन्होंने कभी स्वास्थ्य की परवाह नहीं की। विद्यालय के पहले एफिलिएशन (संबद्धता) के लिए दमे की बीमारी और दिसंबर की भीषण ठंड के बावजूद उन्होंने दिल्ली तक का सफर ट्रेन से तय किया था। उनके जाने से जमशेदपुर के शिक्षा जगत में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता।

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