Ranchi/Jharkhand : झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और रांची पुलिस (Ranchi Police) के बीच चल रहे टकराव में बुधवार को नया मोड़ आ गया है। झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच अब सीबीआई (CBI) से कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान शुरू करने का निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला कथित पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार और ईडी अधिकारियों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। संतोष कुमार पर लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जिसके खिलाफ ईडी ने ईसीआईआर (ECIIR) दर्ज कर रखी है।
12 जनवरी 2026 को पूछताछ के दौरान ईडी कार्यालय में हुई एक घटना के बाद संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में ईडी अधिकारियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद रांची पुलिस ने ईडी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से पूछताछ की थी, जिसे ईडी ने चुनौती दी थी।
स्वयं को घायल कर अधिकारियों को फंसाने की साजिश : ईडी
अदालत में ईडी की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि संतोष कुमार 12 जनवरी को खुद ही ईडी कार्यालय आए थे। पूछताछ के दौरान वे अचानक हिंसक हो गए और खुद ही जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया। ईडी का दावा है कि यह अधिकारियों को डराने और जांच प्रभावित करने की एक सोची-समझी साजिश थी।
ईडी ने अदालत से की थी यह मांग
एयरपोर्ट थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए।
शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी फर्जी एफआईआर दर्ज कराने के लिए मामला दर्ज हो।
मामले के मुख्य तथ्य
संबंधित मामला : यह विवाद रांची के एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा हुआ है।
मुख्य आरोपी : इस पूरे विवाद के केंद्र में संतोष कुमार हैं, जिन पर लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है।
घोटाले की प्रकृति : यह मामला कथित पेयजल घोटाले (Drinking Water Scam) से संबंधित है, जिसमें ईडी ने पहले ही ईसीआईआर दर्ज की है।
हाईकोर्ट का निर्णय : न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की अदालत ने रांची पुलिस से जांच वापस लेकर अब सीबीआई (CBI) को नए सिरे से एफआईआर और अनुसंधान का जिम्मा सौंप दिया है।
इस मामले में दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी बहस हुई। ईडी की ओर से एसजीआई एसवी राजू, अधिवक्ता एके दास और सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार का बचाव करने के लिए उच्चतम न्यायालय के वरीय अधिवक्ता एस नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर उपस्थित थे। अदालत ने 24 फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। हाईकोर्ट के इस आदेश से जहां ईडी अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं राज्य पुलिस की अब तक की जांच पर विराम लग गया है।