March 18, 2026

Jharkhand University Act 2026 : विधानसभा में पारित हुआ झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक

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  • परीक्षा परिणाम 30-45 दिनों में जारी करने का प्रावधान, विश्वविद्यालय व्यवस्था में सुधार पर जोर

Ranchi/Jharkhand : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन की कार्यवाही की दूसरी पाली में चर्चा के बाद झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को पारित कर दिया गया। इससे पहले वर्ष 2025 में प्रस्तुत विधेयक को वापस लेकर संशोधित रूप में यह नया विधेयक सदन में पेश किया गया था।

संशोधन के बाद लाया गया नया विधेयक

विधेयक पेश करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि वर्ष 2025 के विधेयक में कुछ प्रावधानों में संशोधन और सुधार की आवश्यकता थी। इसी कारण उसे वापस लेकर संशोधित स्वरूप में 2026 का विधेयक सदन में लाया गया।

भाजपा विधायकों ने उठाए सवाल, प्रवर समिति को भेजने की मांग

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक राज सिन्हा और अमित यादव ने इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। राज सिन्हा ने कहा कि यह 135 पृष्ठों का विस्तृत विधेयक है और इसे पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है। इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि विधेयक में केवल मामूली संशोधन किए गए हैं।

परीक्षा परिणाम और प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष जोर

विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में परीक्षा परिणामों को समयबद्ध तरीके से जारी करने पर विशेष जोर दिया गया है।मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालयों को 30 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम जारी करना अनिवार्य होगा, जबकि अधिकतम समय सीमा 45 दिन तय की गई है।इसके अलावा, विश्वविद्यालयों में सीनेट की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बैठकें भी बुलाई जा सकेंगी।

आयोग में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करने का प्रावधान

विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग में अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, जैसे प्रधान सचिव या केंद्र सरकार के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को मजबूत और प्रभावी बनाना है।

छात्रों के रोजगार पर फोकस, प्लेसमेंट के लिए अलग व्यवस्था

नए विधेयक में छात्रों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए प्लेसमेंट कंपनियों के लिए अलग कार्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इस पर विधायक राज सिन्हा ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय परिसरों में ही प्लेसमेंट कंपनियों के कार्यालय स्थापित किए जाएं, ताकि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े और पलायन पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 के बाद से सीनेट की बैठकों की जानकारी उपलब्ध नहीं है, जो चिंता का विषय है।

विश्वविद्यालय स्वायत्तता और कुलपति चयन पर बहस

विधेयक पर चर्चा के दौरान राज सिन्हा ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम होने की आशंका जताई और कुलपति चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की।इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने स्पष्ट किया कि राज्य के दो संवैधानिक प्रमुख—राज्यपाल और मुख्यमंत्री—की समिति राज्यहित में निर्णय लेगी और विधेयक में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है।

स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने किया विधेयक पारित

चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने विधेयक को पारित घोषित कर दिया। साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही को 18 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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