May 26, 2026

कोल्हान विश्वविद्यालय में क्लस्टर सिस्टम पर मंथन, स्थानीय भाषाओं को बचाने की उठी मांग

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चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में मंगलवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस आपात बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिषद सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तावित नई क्लस्टर प्रणाली और कॉलेजों में विषयों के पुनर्गठन पर विचार-विमर्श करना था।

बैठक के दौरान कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने क्लस्टर सिस्टम, विषय संयोजन, सीट निर्धारण और संकाय पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं डीन अकेडमिक डॉ. संजय यादव ने विभिन्न बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए बताया कि नई व्यवस्था के तहत कॉलेजों में विषयों और सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा।

इस दौरान कई कॉलेजों में विषय बदलाव के प्रस्ताव भी सामने आए। टाटा कॉलेज, चाईबासा में मुंडारी की जगह कुरमाली विषय शामिल करने की बात हुई, जबकि महिला कॉलेज, चाईबासा में समाजशास्त्र के स्थान पर ‘हो’ भाषा को जोड़ने पर चर्चा की गई। जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिन्दी और अंग्रेज़ी विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया।

इसके अलावा घाटशिला कॉलेज, एसबी कॉलेज चांडिल, बहरागोड़ा कॉलेज और जेएलएन कॉलेज चक्रधरपुर में भी विषय परिवर्तन को लेकर सुझाव दिए गए। कई कॉलेजों में सीटों के पुनर्निर्धारण और संकाय पुनर्विन्यास पर भी चर्चा हुई।

बैठक में सबसे अहम मुद्दा स्थानीय और आदिवासी भाषाओं का रहा। कई प्राचार्यों ने चिंता जताई कि केवल कम नामांकन क्षमता के आधार पर क्षेत्रीय भाषाओं और विषयों को हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ये भाषाएं क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और विरासत से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें बचाना जरूरी है। विश्वविद्यालय ने इस मामले में सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने और संरक्षण की अनुशंसा भेजने पर सहमति जताई।

बैठक में विद्यार्थियों की सुविधा को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए गए। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने निर्देश दिया कि सभी कॉलेज अपनी वेबसाइट पर क्लस्टर सिस्टम से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं और प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले हेल्पलाइन भी संचालित करें। उन्होंने विशेष रूप से आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को समय रहते जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र तैयार रखने की सलाह दी ताकि नामांकन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने नई क्लस्टर प्रणाली को छात्रहित और शैक्षणिक गुणवत्ता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताते हुए अपने सुझाव साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेंद्र भारती ने किया।