June 24, 2026

क्या बाल ठाकरे की राह पर चल रहे हैं एकनाथ शिंदे?

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महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक नया सवाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है—क्या मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत के सबसे बड़े उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं? हाल के महीनों में शिंदे के भाषणों, राजनीतिक अभियानों और प्रतीकों के इस्तेमाल ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

शिंदे ने अपने राजनीतिक विस्तार अभियानों को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया है, जो सीधे तौर पर बाल ठाकरे की पहचान रहे ‘टाइगर’ प्रतीक की याद दिलाता है। शिवसेना स्थापना दिवस के मंच से उन्होंने खुद को ‘टाइगर’ बताते हुए आक्रामक अंदाज में भाषण दिया। विधानसभा सत्र के दौरान उन्हें बाघ की तस्वीर भेंट किए जाने और उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने को भी कई राजनीतिक विश्लेषक एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि शिंदे केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं हैं। वे बाल ठाकरे की तरह आम शिवसैनिकों से सीधे जुड़ने, मजबूत हिंदुत्व की राजनीति करने और गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में कुछ सांसदों के उनके खेमे में आने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ी है, जिससे महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों में नए संकेत दिखाई देने लगे हैं।

इसी बीच शिंदे गुट द्वारा नए शिवसेना भवन की योजना भी चर्चा में है। संभावित स्थानों में दादर और बीकेसी का नाम सामने आया है, जिनका राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व काफी बड़ा माना जाता है। विपक्ष का आरोप है कि शिंदे की बढ़ती ताकत के पीछे शीर्ष स्तर का समर्थन है, जबकि समर्थक इसे उनकी राजनीतिक क्षमता का परिणाम बताते हैं। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या एकनाथ शिंदे सिर्फ शिवसेना का नेतृत्व कर रहे हैं, या फिर बाल ठाकरे जैसी छवि गढ़ने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुके हैं।