May 14, 2026

Limit imposed on supply of Petrol and Diesel- पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर सीमा लगाई गई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में छत्तीसगढ़ (CG) के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अस्थायी सीमा तय कर दी गई है। पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि वे सीमित मात्रा में ही ईंधन वितरित करें, ताकि किसी भी संभावित आपूर्ति संकट की स्थिति में आवश्यक सेवाओं और आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रह सके।ताजा निर्देशों के अनुसार अब एक व्यक्ति को अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल ही दिया जाएगा, जबकि एक बड़े वाहन को लगभग 250 लीटर डीजल उपलब्ध कराने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही जेरीकेन या ड्रम में डीजल की बिक्री पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन और तेल कंपनियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि कृत्रिम कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।राज्य के कई पेट्रोल पंप संचालकों ने पुष्टि की है कि कंपनियों की ओर से मौखिक निर्देश प्राप्त हुए हैं। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या तेल मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है और कई जगहों पर वाहन चालक अतिरिक्त ईंधन भरवाने की कोशिश कर रहे हैं।इस निर्णय का सबसे अधिक असर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और किसानों पर पड़ रहा है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि लंबी दूरी के परिवहन में अधिक डीजल की आवश्यकता होती है और सीमित आपूर्ति से माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है। वहीं किसान संगठनों ने चिंता जताई है कि खेती के मौसम में डीजल की कमी से सिंचाई और कृषि कार्यों पर असर पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है।हालांकि तेल कंपनियों ने आम जनता से घबराने की आवश्यकता नहीं बताई है। उनका कहना है कि देश में पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सीमित वितरण का उद्देश्य केवल आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें।आर्थिक जानकारों के अनुसार यदि मिडिल ईस्ट का तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं तथा आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं।