मुंबई की सबसे बड़ी बस्ती पर अंबानी का दांव! धारावी के बाद अब झुग्गी पुनर्विकास की रेस में उतरा रिलायंस, हजारों परिवारों की बदलेगी तस्वीर
मुंबई: देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी का रिलायंस समूह अब एक ऐसे क्षेत्र में उतर गया है, जहां अब तक बड़े कॉर्पोरेट घरानों की मौजूदगी बेहद सीमित रही है। मुंबई के झुग्गी पुनर्विकास (Slum Redevelopment) सेक्टर में रिलायंस की एंट्री ने रियल एस्टेट और शहरी विकास जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।
इस परियोजना के तहत वर्तमान में जुहू गली में रहने वाले पात्र निवासियों के लिए 28,000 से अधिक पुनर्वास आवास बनाए जाएंगे। यानी हजारों परिवारों को बेहतर आवास और आधुनिक सुविधाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
दिलचस्प बात यह है कि इस टेंडर की दौड़ में सिर्फ रिलायंस ही नहीं था। देश के प्रमुख कारोबारी समूह JSW और शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप ने भी बोली लगाई थी। लेकिन अंततः बाजी रिलायंस के हाथ लगी।
मुंबई में झुग्गी पुनर्विकास परियोजनाएं लंबे समय से कानूनी अड़चनों, भूमि विवादों और निवासियों की सहमति जैसी चुनौतियों से घिरी रही हैं। हालांकि महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल के वर्षों में लागू की गई नई नीतियों ने बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए इस क्षेत्र के दरवाजे खोल दिए हैं।
नई नीति के तहत डेवलपर्स को बड़े भूखंड, अतिरिक्त निर्माण अधिकार और अधिक विकास क्षमता जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट्स आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक बन गए हैं।
रिलायंस को इस परियोजना के तहत निवासियों के अस्थायी किराये की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अगले दो वर्षों में करीब 700 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे। इसके अलावा प्रदर्शन गारंटी और अतिरिक्त सुरक्षा राशि भी देनी होगी, ताकि परियोजना समय पर और सुचारू रूप से पूरी हो सके।
मुंबई में झुग्गी पुनर्विकास की चर्चा पहले से ही धारावी परियोजना को लेकर तेज रही है, जहां अडानी समूह काम कर रहा है। ऐसे में अब रिलायंस की एंट्री को देश के दो सबसे बड़े कारोबारी समूहों के बीच शहरी विकास क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो मुंबई के अन्य बड़े स्लम क्लस्टर्स के पुनर्विकास में भी कॉर्पोरेट भागीदारी और तेज हो सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रिलायंस इस महत्वाकांक्षी परियोजना को किस तरह जमीन पर उतारता है और हजारों परिवारों के जीवन में कितना बदलाव ला पाता है।
