फ्रांस में मोदी का मेगा मिशन: मैक्रों संग टेक्नोलॉजी की नई साझेदारी, ट्रंप से मुलाकात पर भी दुनिया की नज़र
नाइस से शुरू हुआ पीएम मोदी का यूरोप दौरा, AI, रक्षा और वैश्विक राजनीति के बड़े एजेंडे पर होगी चर्चा
रविवार को प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स 2026’ (Bharat Innovates 2026) टेक समिट का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में भारत और फ्रांस के स्टार्टअप्स, डीप-टेक कंपनियां, रिसर्च संस्थान और निवेशक एक मंच पर आएंगे। उद्देश्य है—नई तकनीकों, रिसर्च, निवेश और इनोवेशन के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को नई ऊंचाई देना।
AI से रक्षा तक, कई अहम मुद्दों पर होगी बातचीत
टेक्नोलॉजी के अलावा मोदी और मैक्रों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय हालात प्रमुख विषय होंगे।
माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़े हालात पर भी दोनों नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हो सकती है।
G7 में गूंजेगी भारत और ग्लोबल साउथ की आवाज़
फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया जाएंगे और फिर जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचेंगे। भारत को इस सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है।
प्रधानमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह जी-7 मंच पर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चुनौतियों को मजबूती से उठाएंगे।
क्या होगी मोदी-ट्रंप की मुलाकात?
यात्रा का सबसे चर्चित पहलू संभावित मोदी-ट्रंप मुलाकात भी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कूटनीतिक हलकों की निगाहें इस संभावित बैठक पर टिकी हैं। यदि यह मुलाकात होती है तो व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और हालिया तनावपूर्ण घटनाओं पर अहम चर्चा देखने को मिल सकती है।
भारत-फ्रांस रिश्तों का नया अध्याय
इस साल भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया है। वहीं वर्ष 2026 को दोनों देशों ने ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।
ऐसे में मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी और रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नज़र बनाए रखिए…
नाइस से लेकर जी-7 और फिर पेरिस तक, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा आने वाले दिनों में कई बड़े वैश्विक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। दुनिया देख रही है कि भारत अब सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाली ताकत बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
