June 30, 2026

Preparations underway to change JEE-NEET pattern:JEE-NEET का पैटर्न बदलने की तैयारी, स्कूली सिलेबस को मिलेगा अधिक महत्व,बायोमेट्रिक अटेंडेंस होगी अनिवार्य

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सर्च न्यूज : सच के साथ: केंद्र सरकार देश भर के कोचिंग सेंटरों पर छात्रों की बढ़ती निर्भरता को कम करने और उनके मानसिक तनाव को घटाने के लिए JEE, NEET-UG और CUET-UG जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के पैटर्न में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है

प्रवेश परीक्षाओं के पैटर्न को री-डिजाइन करने की तैयारी: शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय नौ-सदस्यीय समिति (जिसकी अध्यक्षता हायर एजुकेशन सेक्रेटरी विनीत जोशी कर रहे हैं) एक व्यापक रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है। समिति ने सिफारिश की है कि प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न पत्र और पैटर्न को इस तरह से दोबारा तैयार किया जाए कि वे पूरी तरह से स्कूलों की क्लासरूम की पढ़ाई और रेगुलर सिलेबस से जुड़ सकें। इसका मुख्य उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति और कोचिंग सेंटरों द्वारा विकसित की गई ‘शॉर्टकट ट्रिक्स’ के प्रभाव को कम करना है ताकि सामान्य स्कूली शिक्षा की महत्ता को दोबारा बहाल किया जा सके।

कोचिंग सेंटरों के लिए बनेगा सख्त राष्ट्रीय कानून: छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव, आत्महत्या के मामलों, और सुरक्षा खामियों को देखते हुए केंद्र सरकार कोचिंग सेक्टर को विनियमित (Regulate) करने के लिए एक सख्त राष्ट्रीय कानून बनाने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित कानून के तहत कोचिंग संस्थानों के लिए भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी टॉपर्स के दावों पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। साथ ही, संस्थानों को अपने शिक्षकों की योग्यता, फीस संरचना और वास्तविक सफलता दर को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा

कोचिंग के घंटों की सीमा तय करने का सुझाव: समिति ने स्कूली छात्रों पर से पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ घटाने के लिए दैनिक कोचिंग क्लासेस की अधिकतम समय सीमा 2 से 3 घंटे तय करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही यह भी विचार किया जा रहा है कि गहन या इंटेंसिव कोचिंग को केवल कक्षा 12वीं के बाद के चरण तक ही सीमित रखा जाए, ताकि कम उम्र से ही बच्चों पर प्रतियोगी परीक्षाओं का मानसिक दबाव न बने

डमी स्कूलों पर लगाम और बायोमेट्रिक उपस्थिति: रिपोर्ट में गैर-अटेंडिंग या ‘डमी स्कूलों’ के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई गई है, जहाँ छात्र केवल नाम के लिए दाखिला लेते हैं और पूरा समय कोचिंग में बिताते हैं। डमी स्कूली शिक्षा पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए स्कूलों में रियल-टाइम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, बोर्ड परीक्षाओं के अंकों को अधिक विश्वसनीय और महत्व देने का भी प्रयास किया जाएगा ताकि छात्र स्कूलों को छोड़कर केवल कोचिंग पर निर्भर न रहें।