रांची में नदी किनारे बने घरों पर मंडराया खतरा! अवैध निर्माण पर सरकार का बड़ा एक्शन
रांची में नदी और जलस्रोतों के किनारे बने अवैध निर्माणों पर अब बड़ा प्रशासनिक एक्शन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद राजधानी में नदियों, नालों और जलाशयों पर हुए कब्जों को हटाने की तैयारी तेज हो गई है। इस खबर के सामने आते ही हजारों लोगों की चिंता बढ़ गई है, खासकर उन परिवारों की जिन्होंने नदी किनारे जमीन खरीदकर घर बना लिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जमीन दलालों ने सस्ते दाम का लालच देकर नदी किनारे की जमीन बड़े पैमाने पर बेची। कई लोगों ने कम कीमत देखकर जमीन खरीद ली, लेकिन अब वही फैसला उनके लिए चिंता का कारण बनता दिख रहा है।
रांची के कई इलाकों — जैसे स्वर्णरेखा नदी के आसपास हेतू, घाघरा, केतारी बगान, नामकुम, जोरार और गेतलसूद की तरफ — तेजी से अतिक्रमण बढ़ा है। लोगों का कहना है कि पहले जहां नदियों का बहाव काफी चौड़ा था, आज वहां मकान और निर्माण खड़े दिखाई देते हैं।
हालांकि, शहर के कई नागरिक सरकार की इस कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर नदियों और जलस्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाता है, तो बारिश का पानी फिर से प्राकृतिक तरीके से बह सकेगा। इससे जलजमाव की समस्या कम होगी और भविष्य में पानी की कमी से भी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नदी का रास्ता सिकुड़ने से बरसात में पानी सड़कों और मोहल्लों में भर जाता है। ऐसे में जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के लिए यह कार्रवाई जरूरी मानी जा रही है।
अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सवाल सिर्फ अवैध निर्माण हटाने का नहीं, बल्कि उन लोगों का भी है जिन्होंने बिना पूरी जानकारी के अपनी जिंदगी भर की कमाई इन जमीनों में लगा दी।
