February 11, 2026

संथाली भाषा के छात्रों को अन्य भाषाओं से परिचित कराने की जरुरत

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करनडीह में पारसी महा और ओल चिकी के शताब्दी समारोह का समापन, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू हुईं शामिल

जमशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज करनडीह में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में भाग लिया. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है. हालांकि एक शताब्दी पूर्व संथाली भाषा के लिए लिपि के अभाव में रोमन, देवनागरी, ओडिया और बंगला जैसी विभिन्न लिपियों का प्रयोग किया जाता था. इन लिपियों में कई संथाली शब्दों का सही उच्चारण नहीं हो पाता था. वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने ओल चिकी लिपि का सृजन किया. तब से यह लिपि संथाल पहचान का एक सशक्त प्रतीक बन गई है.
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर ओल चिकी लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत के संविधान को जारी करने का मौका मिला. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब संथाली भाषी लोग अपनी मातृभाषा और ओल चिकी लिपि में लिखे संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे. राष्ट्रपति ने कहा कि किसी अन्य भाषा में शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ ओल चिकी लिपि में मातृभाषा संथाली सीखना भी संथाल समुदाय के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि लेखक और भाषा प्रेमी संथाली भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहे हैं.
महामहिम ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकास के पथ पर आगे बढऩे का आग्रह किया. कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली संथाली समुदाय और अन्य जनजातीय समुदायों से सीखी जा सकती है. संथाली साहित्य को संथाली समुदाय की मौखिक परंपराओं और गीतों से शक्ति मिलती है. कई लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से संथाली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के लोगों को जागृत करना एक महत्वपूर्ण कार्य है. उन्होंने लेखकों से अपने लेखन के माध्यम से ऐसा करने का आग्रह किया.
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भाषा और साहित्य समुदायों को आपस में जोड़ते हैं. विभिन्न भाषाओं के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान उन भाषाओं और समुदायों को समृद्ध करता है. अनुवाद इस आदान-प्रदान को संभव बनाते हैं. इसलिए संथाली भाषा के छात्रों को अन्य भाषाओं से परिचित कराने की आवश्यकता है. संथाली साहित्य को अन्य भाषाओं के छात्रों तक पहुंचाने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जाने चाहिए. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अखिल भारतीय संथाली लेखक संघ इस कार्य को प्रभावी ढंग से करेगा.

आयोजन को सफल बनाने में भूमिका निभानेवालों को डीसी ने दी बधाई
राष्ट्रपति के जिला भ्रमण के सफल, सुव्यवस्थित एवं आयोजन के उपरांत उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन सहित सभी लाइन डिपार्टमेंट, सुरक्षा एजेंसियों तथा कार्यक्रम से जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को धन्यवाद एवं सराहना की है. उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक संपूर्ण कार्यक्रमों के निर्बाध संचालन हेतु सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों द्वारा की गई विस्तृत योजना, सटीक क्रियान्वयन तथा उत्कृष्ट अंतर-विभागीय समन्वय अत्यंत सराहनीय रहा. सुरक्षा व्यवस्था, रूटलाइन प्रबंधन, कार्यक्रम स्थलों की तैयारी, यातायात नियंत्रण, विधि-व्यवस्था संधारण, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण एवं प्रोटोकॉल अनुपालन जैसे प्रत्येक पहलू पर उच्च स्तर की पेशेवर दक्षता एवं अनुशासन का परिचय दिया गया. उन्होंने सभी के समर्पण, परिश्रम एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार समन्वय एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताई.