सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर स्थित टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन की एक महत्वपूर्ण कमेटी मीटिंग 25 मई, 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु लंबे समय से लंबित वेज रिवीजन (वेतन संशोधन) समझौता रहा। यूनियन के पदाधिकारियों और कमेटी सदस्यों ने प्रबंधन पर बेहतर वेतन वृद्धि और अन्य वित्तीय लाभों के लिए दबाव बनाया, क्योंकि वर्तमान महंगाई के दौर में कर्मचारी अपने वेतन में उचित बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
बैठक के दौरान कर्मचारियों की ओर से मिनिमम गारंटेड बेनिफिट (MGB) और महंगाई भत्ते (DA) के मूल्यों पर गहरी असहमति देखी गई। जहां प्रबंधन ने 7.50 प्रतिशत MGB और ₹9,000 की पेशकश की है, वहीं यूनियन नेतृत्व इसे नाकाफी बताते हुए पुरानी पद्धति और बढ़ती महंगाई के अनुरूप अधिक वृद्धि की मांग पर अड़ा हुआ है। इसके चलते वेतन समझौता पिछले 16 महीनों से अधिक समय से अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों में काफी बेचैनी है।वेतन संशोधन के अलावा, बैठक में कई अन्य अहम मुद्दे भी उठाए गए जो सीधे तौर पर कर्मचारियों के कल्याण और कार्यस्थल की सुविधाओं से जुड़े हैं। यूनियन के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि जब तक बेसिक सैलरी (मूल वेतन) में सम्मानजनक वृद्धि नहीं होती, तब तक कर्मचारियों का असंतोष कम नहीं होगा। कमेटी मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रबंधन के साथ वार्ता के अगले दौर में किन रणनीतियों को अपनाकर अपनी मांगों को मनवाया जाए।
फिलहाल, मई के अंत तक इस समझौते पर किसी अंतिम नतीजे पर पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है। यूनियन और प्रबंधन के बीच बैठकों का सिलसिला जारी है, लेकिन ठोस सहमति न बन पाने के कारण अगली बैठकों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। कर्मचारियों का मानना है कि टाटा स्टील जैसे बड़े संस्थान को अपने कार्यबल की आर्थिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।