अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके टैक्स रिटर्न लीक होने और उससे जुड़े अरबों डॉलर के मुकदमे का है। ट्रंप और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच अब इस विवाद को लेकर समझौता हो गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, ट्रंप ने अमेरिकी कर विभाग IRS और ट्रेजरी डिपार्टमेंट पर आरोप लगाया था कि उनकी निजी टैक्स जानकारी को गलत तरीके से लीक होने दिया गया। ट्रंप का दावा था कि एक सरकारी कॉन्ट्रैक्टर ने उनके, उनके बेटों और ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े गोपनीय टैक्स दस्तावेज मीडिया संस्थानों तक पहुंचाए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।
इस पूरे विवाद को लेकर ट्रंप ने करीब 10 बिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया था। अब कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच गए हैं। हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस डील के तहत एक बड़ा फंड बनाया जा सकता है, जिससे उन लोगों को मुआवजा दिया जाएगा जो खुद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया मानते हैं।
ट्रंप की कानूनी टीम ने इस मामले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। उनका कहना है कि निजी टैक्स जानकारी को सार्वजनिक करना सिर्फ ट्रंप परिवार ही नहीं बल्कि अमेरिकी कानून और निजता के अधिकार पर हमला था। दूसरी ओर डेमोक्रेट सांसदों ने इस समझौते पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इससे टैक्सपेयर के पैसों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए हो सकता है।
मामले में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब जज कैथलीन विलियम्स ने यह सवाल उठाया कि क्या कोई मौजूदा राष्ट्रपति अपनी ही सरकार के खिलाफ इस तरह मुकदमा चला सकता है। लेकिन ट्रंप के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि समझौते के बाद अब किसी अतिरिक्त न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
इस घटनाक्रम ने अमेरिका में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। समर्थक इसे ट्रंप की “कानूनी जीत” बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे सत्ता और प्रभाव के इस्तेमाल का उदाहरण मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला अमेरिकी राजनीति में और बड़े विवाद का रूप ले सकता है।