June 20, 2026

ट्रंप के एक फैसले ने पाकिस्तान को किया किनारे!

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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच खुद को अहम मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा पाकिस्तान उस समय असहज स्थिति में आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर पूरी कूटनीतिक तस्वीर बदल दी। शुरुआती वार्ताओं की मेजबानी करने वाले पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इस समझौते का प्रमुख चेहरा बनेगा, लेकिन अंतिम क्षणों में हुए घटनाक्रम ने उसकी भूमिका को लगभग हाशिये पर पहुंचा दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर 17 जून को फ्रांस के वर्साय में सहमति बनी, जबकि स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित औपचारिक वार्ता और हस्ताक्षर कार्यक्रम बाद में स्थगित हो गया। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व की कूटनीतिक उम्मीदों को झटका लगा। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समझौते को अपनी बड़ी विदेश नीति उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना चाहता था।

दिलचस्प बात यह रही कि इसी दौरान ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने भारत को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए संकेत दिया कि मध्य-पूर्व में शांति प्रयासों में भारत की भूमिका भविष्य में अहम हो सकती है। ट्रंप की इन टिप्पणियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को फिर चर्चा में ला दिया, जबकि पाकिस्तान के लिए यह संदेश राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से असहज माना जा रहा है।

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी की कई वैश्विक नेताओं के साथ सक्रिय बातचीत चर्चा का विषय बनी रही। भारत और अमेरिका ईरान के परमाणु मुद्दे तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर समान रुख रखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया घटनाक्रम ने यह दिखाया है कि वैश्विक कूटनीति में अंतिम निर्णय अक्सर बड़े देशों के रणनीतिक हितों से तय होते हैं, और पाकिस्तान को अब इस नई वास्तविकता के अनुरूप अपनी विदेश नीति का आकलन करना पड़ सकता है।