May 16, 2026

PM Modi sets foot in the Netherlands on the second leg of his global tour-वैश्विक दौरे के दूसरे चरण में पीएम मोदी ने नीदरलैंड में रखा कदम





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के महत्वपूर्ण विदेश दौरे के दूसरे चरण में शुक्रवार, 15 मई 2026 को नीदरलैंड पहुंच गए। एम्स्टर्डम एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान नीदरलैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, भारतीय राजदूत कुमार तुही और कई गणमान्य लोगों ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच तेजी से मजबूत हो रहे आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाएगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी प्रधानमंत्री की यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-नीदरलैंड साझेदारी को और व्यापक बनाने का अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी यूरोप के मुख्य भूभाग में बसे सबसे बड़े भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद प्रधानमंत्री की यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड पहुंचने से पहले संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में लगभग ढाई घंटे के संक्षिप्त दौरे पर रुके थे। अबू धाबी में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग को लेकर चर्चा हुई। यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है और हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध काफी मजबूत हुए हैं।

नीदरलैंड में प्रधानमंत्री मोदी की यह दूसरी यात्रा है। इससे पहले वे वर्ष 2017 में इस यूरोपीय देश गए थे। पिछले कुछ वर्षों में भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार, कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान एवं तकनीक और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। यही कारण है कि इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी यहां नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नीदरलैंड के बीच तकनीकी सहयोग आने वाले समय में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। नीदरलैंड भारत के लिए यूरोप का एक बड़ा निर्यात बाजार भी है। भारत से दवाइयां, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद, रसायन और इंजीनियरिंग वस्तुएं बड़ी मात्रा में नीदरलैंड भेजी जाती हैं। वहीं नीदरलैंड से भारत में तकनीक, मशीनरी और निवेश आता है।

इसके अलावा नीदरलैंड भारत में निवेश करने वाले प्रमुख देशों में भी शामिल है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक भारत में नीदरलैंड का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई लगभग 55.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इससे यह साफ होता है कि यूरोपीय निवेशकों के लिए भारत एक बड़ा और आकर्षक बाजार बनता जा रहा है।

भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन को लेकर भी मजबूत सहयोग है। नीदरलैंड दुनिया में जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण तकनीकों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में कई राज्यों में जल प्रबंधन परियोजनाओं में डच विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ रही है। आधुनिक खेती, डेयरी उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नीदरलैंड की तकनीक भारत के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में हरित ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर भी विशेष ध्यान रहेगा। भारत ने हाल के वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य तय किए हैं। नीदरलैंड भी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में अग्रणी देशों में गिना जाता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है।

रक्षा क्षेत्र में भी भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग बढ़ रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति जैसे विषयों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राएं हमेशा से भारत की वैश्विक कूटनीति को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा रही हैं। इस पांच देशों की यात्रा का उद्देश्य भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना है। नीदरलैंड दौरे को विशेष रूप से यूरोप में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। यदि यह समझौता सफल होता है तो भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे और विदेशी निवेश भी बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत की विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ यह दौरा भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताओं और समझौतों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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