Foreign Portfolio Investors Get Relief as Securities and Exchange Board of India Clarifies PAN Requirements-विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को राहत, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने PAN की ज़रूरतों को साफ़ किया
भारत में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPIs) को बड़ी राहत देते हुए Securities and Exchange Board of India यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने पैन (PAN) आवेदन प्रक्रिया से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किए हैं। यह कदम उन कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिनका सामना विदेशी निवेशकों को नए पैन आवेदन फॉर्म भरने के दौरान करना पड़ रहा था।
दरअसल, मार्च 2026 में Central Board of Direct Taxes यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा नए पैन आवेदन फॉर्म जारी किए गए थे। इन नए फॉर्मों में कुछ अतिरिक्त जानकारियां और प्रक्रियाएं शामिल की गई थीं, जिनके कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आवेदन करने में कई तकनीकी और दस्तावेजी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। FPIs ने इस संबंध में अपनी चिंताओं को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के समक्ष रखा था। इसके बाद SEBI ने स्थिति का अध्ययन कर आवश्यक स्पष्टीकरण जारी किए हैं, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
SEBI द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, अब पैन आवेदन प्रक्रिया में “Representative” या प्रतिनिधि संबंधी जानकारी के लिए Common Application Form में दिए गए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorised Signatory) का नाम ही पर्याप्त माना जाएगा। पहले इस प्रक्रिया में अलग-अलग दस्तावेज और अतिरिक्त विवरण मांगे जा रहे थे, जिससे विदेशी निवेशकों को कठिनाई हो रही थी। नए निर्देशों के बाद प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक बन जाएगी।
इसके अलावा SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के पास PAN, आधार या पासपोर्ट से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो FPI अपने पंजीकरण संख्या (Registration Number) का उपयोग कर सकते हैं। यह कदम विशेष रूप से उन विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो विभिन्न देशों में कार्यरत हैं और जिनके प्रतिनिधियों के पास भारतीय पहचान दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते।
SEBI द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में टैक्सपेयर आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN) से जुड़ी समस्या का भी समाधान किया गया है। कई देशों में TIN प्रणाली लागू नहीं है या वहां इस प्रकार की व्यवस्था मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशकों को पैन आवेदन फॉर्म भरने में परेशानी होती थी। अब SEBI ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों में TIN लागू नहीं है, वहां के निवेशक पैन फॉर्म में “000 000 000 0” यानी दस बार शून्य लिखकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे उन देशों के निवेशकों को बड़ी सहूलियत मिलेगी, जहां कर पहचान प्रणाली अलग प्रकार से संचालित होती है।
मोबाइल नंबर से संबंधित नियमों में भी ढील दी गई है। SEBI ने कहा है कि यदि किसी विदेशी निवेशक के पास मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं है, तो वह आवेदन के दौरान लैंडलाइन नंबर भी प्रदान कर सकता है। पहले मोबाइल नंबर अनिवार्य होने के कारण कई निवेशकों को तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता था। अब यह नई व्यवस्था आवेदन प्रक्रिया को अधिक लचीला और आसान बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI के ये नए स्पष्टीकरण विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाएंगे। भारत लगातार विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में कई सुधार कर रहा है। ऐसे में यदि निवेशकों को पंजीकरण और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तो इसका प्रभाव निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है। SEBI का यह कदम निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने में मदद करेगा।
दरअसल, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत के शेयर बाजार और पूंजी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये निवेशक भारतीय कंपनियों में निवेश कर देश की आर्थिक वृद्धि को गति देते हैं। जब विदेशी निवेश बढ़ता है, तो शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है, कंपनियों को पूंजी जुटाने में आसानी होती है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसलिए सरकार और नियामक संस्थाएं लगातार निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
FPIs भारत में निवेश के लिए एक Common Application Form का उपयोग करते हैं। इसी एक फॉर्म के माध्यम से वे SEBI में पंजीकरण, बैंक खाता खोलने, डिमैट अकाउंट बनाने और PAN आवेदन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करते हैं। लेकिन हाल ही में लागू नए पैन आवेदन नियमों के कारण इन प्रक्रियाओं में जटिलता बढ़ गई थी। SEBI ने अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर इन जटिलताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। दुनिया की बड़ी निवेश कंपनियां भारतीय बाजार में लगातार निवेश बढ़ा रही हैं। ऐसे में नियामकीय प्रक्रियाओं का सरल और निवेशक-अनुकूल होना बेहद आवश्यक है। SEBI के ताजा कदम से यह संदेश गया है कि भारतीय नियामक संस्थाएं निवेशकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनती हैं और समय पर समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इसके साथ ही, यह निर्णय “Ease of Doing Business” और “Ease of Investing” की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत सरकार और वित्तीय संस्थाएं लंबे समय से यह प्रयास कर रही हैं कि विदेशी निवेशकों को कम से कम दस्तावेजी बाधाओं का सामना करना पड़े। नई व्यवस्था से न केवल आवेदन प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि विदेशी निवेशकों का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में भारतीय पूंजी बाजार पर दिखाई दे सकता है। सरल नियमों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के कारण अधिक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे विदेशी पूंजी प्रवाह में वृद्धि होने की संभावना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, Securities and Exchange Board of India द्वारा जारी ये नए स्पष्टीकरण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। PAN आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाकर SEBI ने यह साबित किया है कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बाजार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।