मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी अब रिलायंस समूह की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की कमान संभालने जा रहे हैं। कंपनी ने उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति पिछले महीने से प्रभावी मानी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब जियो प्लेटफॉर्म्स अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) की तैयारी में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि कंपनी मई के अंत या जून महीने तक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) के पास अपने आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर जमा कर सकती है।
आकाश अंबानी पहले से ही रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन हैं, जो जियो प्लेटफॉर्म्स की टेलीकॉम शाखा है। उन्होंने जून 2022 में यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के बाद उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। रिलायंस समूह की डिजिटल और तकनीकी रणनीति को आगे बढ़ाने में आकाश अंबानी की अहम भूमिका मानी जा रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लंबे समय से भारत की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कंपनियों में शामिल रही है। पेट्रोकेमिकल, रिफाइनिंग और रिटेल के बाद कंपनी ने डिजिटल सेक्टर में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। जियो की शुरुआत ने भारतीय टेलीकॉम बाजार को पूरी तरह बदल दिया। सस्ती इंटरनेट सेवाओं और डेटा क्रांति के कारण जियो कुछ ही वर्षों में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई। अब कंपनी डिजिटल सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आकाश अंबानी की नियुक्ति रिलायंस समूह में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। मुकेश अंबानी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में उनके बच्चे समूह के अलग-अलग कारोबारों को संभालेंगे। ईशा अंबानी रिटेल कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जबकि अनंत अंबानी ऊर्जा और ग्रीन बिजनेस से जुड़े कार्यों पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में जियो प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी आकाश अंबानी को सौंपना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जियो प्लेटफॉर्म्स में दुनिया के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। खासतौर पर खाड़ी देशों के सॉवरेन वेल्थ फंड्स यानी सरकारी निवेश कोषों ने कंपनी में बड़ा निवेश किया है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात का अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), मुबाडाला और सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) शामिल हैं। इन निवेशकों ने कुछ वर्ष पहले जियो प्लेटफॉर्म्स में अरबों डॉलर का निवेश किया था। इससे जियो की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई।
सूत्रों के अनुसार, आईपीओ से पहले इन निवेशकों की योजना अपने कुछ शेयर बेचने की थी। शुरुआत में कंपनी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही थी। लेकिन बाद में कंपनी ने यह योजना बदल दी और अब केवल 2.5 प्रतिशत नए शेयर जारी करने का फैसला किया गया है। इससे कंपनी को नई पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी और मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ेगा।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन लगभग 4.5 अरब डॉलर आंकी जा रही है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ के समय कंपनी का मूल्यांकन इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि भारतीय डिजिटल बाजार तेजी से बढ़ रहा है और जियो की बाजार हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है।
भारत में डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स, वीडियो स्ट्रीमिंग और क्लाउड सेवाओं के विस्तार से जियो जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिल रहा है। जियो ने केवल टेलीकॉम सेवा तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उसने डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया है। कंपनी जियो सिनेमा, जियो टीवी, जियो फाइनेंशियल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए करोड़ों ग्राहकों तक पहुंच बना चुकी है।
विश्लेषकों का कहना है कि आकाश अंबानी की अगुवाई में जियो नई तकनीकों पर अधिक ध्यान दे सकती है। 5G नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जियो के बड़े निवेश की संभावना जताई जा रही है। कंपनी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है।
आईपीओ के जरिए जियो प्लेटफॉर्म्स को न केवल पूंजी मिलेगी बल्कि शेयर बाजार में उसकी स्वतंत्र पहचान भी बनेगी। इससे निवेशकों को रिलायंस समूह के डिजिटल कारोबार में सीधे निवेश करने का अवसर मिलेगा। शेयर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जियो का आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक साबित हो सकता है।
आकाश अंबानी की नेतृत्व क्षमता को लेकर भी बाजार में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। युवा नेतृत्व, तकनीकी समझ और डिजिटल क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका को कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिलायंस समूह अब पारंपरिक कारोबार के साथ-साथ नई तकनीकों और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर बड़ा दांव लगा रहा है।
कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स में आकाश अंबानी की नियुक्ति और कंपनी की आईपीओ तैयारी भारतीय कॉरपोरेट जगत में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। खाड़ी देशों के बड़े निवेशकों का समर्थन, तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार और रिलायंस समूह की मजबूत रणनीति जियो को आने वाले वर्षों में और अधिक ताकतवर बना सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जियो का आईपीओ बाजार में कितना बड़ा प्रभाव डालता है और आकाश अंबानी अपने नेतृत्व में कंपनी को किस नई ऊंचाई तक पहुंचाते हैं।