June 14, 2026

149 दिन बाद जेल से बाहर आए हेमंत सोरेन! हाईकोर्ट से मिली राहत, बोले- ‘झूठे केस में फंसाया गया’

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झारखंड की राजनीति में बड़ा मोड़, जेल से निकलते ही हेमंत सोरेन का सत्ता और सिस्टम पर तीखा हमला

रांची: झारखंड की राजनीति में उस दिन बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आखिरकार जेल से रिहाई मिल गई। करीब पांच महीने तक जेल में रहने के बाद जैसे ही वे रांची की बिरसा मुंडा जेल से बाहर निकले, समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। जेल के बाहर बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और पूरे इलाके में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।

हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

क्या है पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि रांची में 8.36 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन में उनकी भूमिका रही है।

गिरफ्तारी के बाद यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया था और विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया था।

जेल से बाहर आते ही क्या बोले हेमंत?

रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया और मजबूरन लगभग पांच महीने जेल में बिताने पड़े। उन्होंने दावा किया कि सच अंततः सामने आया और उन्हें न्याय मिला है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि विरोधी दलों का कहना है कि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

झारखंड की राजनीति में क्या बदल सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि हेमंत सोरेन की रिहाई झारखंड की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। उनकी वापसी से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखने को मिल सकता है और राज्य की राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में हेमंत सोरेन की सक्रियता राज्य की सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

समर्थकों में जश्न का माहौल

जेल के बाहर मौजूद समर्थकों ने फूल-मालाओं और नारों के साथ उनका स्वागत किया। कई कार्यकर्ताओं ने इसे ‘संघर्ष की जीत’ बताया। रिहाई की खबर मिलते ही राज्य के कई हिस्सों में जश्न का माहौल देखने को मिला।

आखिर में…

करीब 149 दिन जेल में बिताने के बाद हेमंत सोरेन की रिहाई सिर्फ एक कानूनी घटनाक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उनकी वापसी राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।बड़े हिंदी अखबारों जैसी वायरल हेडलाइन विकल्प

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