जमशेदपुर की बेटी ने रचा इतिहास! गुरुग्राम की 1000 फीट लंबी दीवार पर उकेरी ऐसी कहानी, जिसे देखकर हर कोई ठहर गया
सुमन प्रसाद और उनकी टीम ने कला को बनाया बदलाव का हथियार, देशभर में हो रही सराहना
यह कोई साधारण वॉल पेंटिंग नहीं है। इस भव्य कला परियोजना के जरिए महिला स्वच्छता, मासिक धर्म जागरूकता और सम्मान जैसे विषयों को बेहद प्रभावशाली तरीके से लोगों के सामने रखा गया है। यही वजह है कि यह पहल अब कला जगत के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बन गई है।
1000 फीट की दीवार बनी जागरूकता का कैनवास
गुरुग्राम के व्यस्त अंडरपास की दीवारों पर बनाए गए करीब 50 अलग-अलग चित्र महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक सम्मान से जुड़े संदेश देते हैं। इन चित्रों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि राहगीर एक नजर में संदेश को समझ सकें और सोचने पर मजबूर हो जाएं।
इस परियोजना को पिंकीशे फाउंडेशन, अमेजन, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण और नगर निगम के सहयोग से पूरा किया गया।
एक महीने की मेहनत, अनगिनत चुनौतियां
इस ऐतिहासिक पेंटिंग को तैयार करने में टीम को एक महीने से अधिक समय लगा। तेज गर्मी, मौसम की चुनौतियां और तकनीकी परेशानियां भी टीम के हौसले को नहीं रोक सकीं।
सुमन प्रसाद बताती हैं कि कई बार हालात मुश्किल हुए, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। लगातार दिन-रात मेहनत कर उन्होंने इस विशाल परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया।
सिर्फ कला नहीं, एक सामाजिक मिशन
सुमन का मानना है कि कला सिर्फ दीवारों को सुंदर बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने की ताकत भी रखती है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस परियोजना को केवल एक पेंटिंग नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान का रूप दिया।
उनका कहना है कि यदि कला लोगों को सोचने पर मजबूर कर दे और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके, तो कलाकार का उद्देश्य सफल हो जाता है।
जमशेदपुर का बढ़ाया मान
सुमन प्रसाद की इस उपलब्धि ने पूरे जमशेदपुर को गर्व करने का मौका दिया है। स्थानीय कलाकारों और युवाओं के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है कि बड़े सपने और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
आज गुरुग्राम की वह 1000 फीट लंबी दीवार सिर्फ रंगों से नहीं सजी है, बल्कि उसमें एक संदेश, एक सोच और एक बदलाव की उम्मीद भी दिखाई देती है।
आखिर में…
जमशेदपुर की बेटी ने साबित कर दिया कि कला सिर्फ कैनवास तक सीमित नहीं होती। जब रंगों में उद्देश्य जुड़ जाए, तो एक दीवार भी समाज को बदलने का माध्यम बन सकती है।
