दुनिया की समुद्री तकनीक तेजी से बदल रही है और अब वैज्ञानिकों ने ऐसी अनक्रूड यानी बिना चालक वाली हाइड्रोजन पावर्ड पनडुब्बी विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जो लंबे समय तक महासागरों में गश्त कर सकेगी। यह नई पीढ़ी की सबमरीन पारंपरिक ईंधन की जगह ग्रीन हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल करेगी, जिससे यह बेहद शांत, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बन जाएगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह की स्वायत्त पनडुब्बियां समुद्र के भीतर लंबे समय तक बिना सतह पर आए ऑपरेशन कर सकती हैं। इन्हें निगरानी, समुद्री रिसर्च, सुरक्षा मिशन और अंडरवॉटर डेटा कलेक्शन जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक नौसेना और समुद्री परिवहन दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें शोर बहुत कम होता है, जिससे पनडुब्बी को आसानी से ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को भी काफी कम करती है। कई देशों की नौसेनाएं पहले से एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन और हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं ताकि उनकी सबमरीन ज्यादा समय तक पानी के अंदर रह सकें।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हाइड्रोजन स्टोरेज, सुरक्षा और लंबे समय तक ऊर्जा प्रबंधन जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं। इसके बावजूद यह तकनीक भविष्य की समुद्री युद्ध और रिसर्च रणनीतियों में गेमचेंजर साबित हो सकती है।