May 14, 2026

“हजार बागों की धरती” से धूल और गड्ढों की त्रासदी तक: अवैध खनन पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त

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सर्च न्यूज: सच के साथ: झारखंड के हजारीबाग में लंबे समय से चल रहे अवैध पत्थर खनन और क्रशर यूनिट्स के खिलाफ Jharkhand High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि जिस हजारीबाग को कभी “हजार बागों का शहर” कहा जाता था, वह अब धीरे-धीरे पर्यावरणीय विनाश और धूल भरे गड्ढों में बदलता जा रहा है। अदालत ने अवैध खनन को प्रकृति और मानव जीवन पर “सीधा हमला” बताते हुए कई क्षेत्रों में खनन और स्टोन क्रशर गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच 2013 में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हजारीबाग के इचक क्षेत्र और सिवाने नदी के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, जिससे खेती, जंगल, जल स्रोत और स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि पत्थर क्रशरों से निकलने वाली धूल केवल जंगलों को नहीं ढक रही, बल्कि पेड़ों की “सांस” तक रोक रही है।

कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण खेती की उत्पादकता में भारी गिरावट आई है और लोगों में सिलिकोसिस, टीबी, सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अदालत ने यह भी माना कि स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई क्रशर यूनिट्स के पास जरूरी पर्यावरणीय अनुमति तक नहीं थी। अदालत ने प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, GPS और निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद कार्रवाई न होना “जानबूझकर आंखें बंद करने” जैसा है।

हाई कोर्ट ने अब जिला स्तर की टास्क फोर्स को सभी खनन और पर्यावरणीय अनुमति की जांच करने, अवैध खनन पर कार्रवाई तेज करने, CCTV और GPS आधारित निगरानी लागू करने और बंद पड़ी खदानों को सुरक्षित करने का आदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों का पालन नहीं करने पर अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।