गुवाहाटी: असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पास होने के बाद राज्य की राजनीति और देशभर में नई बहस छिड़ गई है। Himanta Biswa Sarma सरकार ने विधानसभा के अंतिम दिन भारी हंगामे के बीच इस बिल को मंजूरी दिला दी। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बनने जा रहा है।
इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और जमीन-जायदाद से जुड़े कई नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, ताकि व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाई जा सके।
विधानसभा में बिल पेश होते ही विपक्ष ने इसका जोरदार विरोध किया और इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग उठाई। विपक्षी दलों का आरोप है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा और सभी समुदायों की राय लेना जरूरी था। हालांकि सरकार ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए बहुमत के आधार पर बिल पास करा लिया।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और समाज में समानता को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से देश में समान नागरिक संहिता पर चर्चा होती रही है और असम ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि UCC केवल कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सुधारवादी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक और सामाजिक विविधता के खिलाफ मान रहे हैं।
फिलहाल असम सरकार इस कानून को जल्द लागू करने की तैयारी में जुट गई है। अब देशभर की नजर इस बात पर टिकी है कि UCC लागू होने के बाद राज्य में इसके क्या व्यावहारिक असर देखने को मिलते हैं।