May 18, 2026

Delhi Sees Second CNG Price Hike in 48 Hours Amid Rising Input Costs-इनपुट लागत में वृद्धि के बीच दिल्ली में 48 घंटों में दूसरी बार सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।





दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में लगातार दूसरी बार बढ़े CNG के दाम, आम जनता पर बढ़ा बोझ

राष्ट्रीय राजधानी Delhi समेत उत्तर भारत के कई शहरों में एक बार फिर कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। रविवार, 17 मई 2026 की सुबह लोगों को महंगे CNG के साथ दिन की शुरुआत करनी पड़ी। पिछले 48 घंटों में यह दूसरी बार है जब CNG की कीमतों में इजाफा किया गया है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में अब CNG की कीमत ₹80.09 प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे पहले 15 मई 2026 को भी CNG के दामों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी। ताजा बढ़ोतरी के बाद कुल मिलाकर दो दिनों में CNG ₹3 प्रति किलोग्राम महंगी हो चुकी है।

उत्तर भारत की सबसे बड़ी CNG वितरक कंपनी Indraprastha Gas Limited ने रविवार को जारी बयान में कहा कि इनपुट गैस की लागत में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर की कीमत में तेज उछाल के कारण यह फैसला लिया गया है। कंपनी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है, जिसके चलते CNG की खुदरा कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि “CNG की खुदरा कीमतों में संशोधन केवल बढ़ी हुई इनपुट गैस लागत और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के उद्देश्य से किया गया है।” हालांकि कंपनी ने यह भी दावा किया कि नई कीमतों के बावजूद CNG अभी भी पेट्रोल और डीजल की तुलना में काफी सस्ता विकल्प बना हुआ है। IGL के अनुसार मौजूदा कीमतों पर भी CNG से चलने वाले वाहन अन्य ईंधनों की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत तक कम परिचालन लागत देते हैं।

CNG की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का असर सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा, टैक्सी, कैब और निजी वाहन CNG पर चलते हैं। ऐसे में किराए में बढ़ोतरी की संभावना भी तेज हो गई है। ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से ईंधन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उनकी आमदनी में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। कई चालकों ने संकेत दिए हैं कि यदि कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो उन्हें यात्रियों से अधिक किराया लेना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CNG की कीमतों में वृद्धि के पीछे केवल घरेलू कारण नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की मांग बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से आयातित गैस महंगी हो गई है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।

इसी बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की खबर सामने आई है। विभिन्न ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के सभी वेरिएंट्स पर लगभग ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इससे परिवहन लागत बढ़ने की आशंका और अधिक गहरा गई है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

आर्थिक जानकारों के अनुसार यदि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है तो महंगाई दर पर भी इसका असर पड़ सकता है। पहले से ही खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से आम जनता परेशान है। ऐसे में CNG, पेट्रोल और डीजल की महंगाई लोगों की घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण के लिहाज से CNG अभी भी बेहतर ईंधन है। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है और कार्बन उत्सर्जन भी कम करता है। इसी कारण सरकार और कंपनियां लंबे समय से CNG आधारित वाहनों को बढ़ावा देती रही हैं। लेकिन यदि इसकी कीमतों में लगातार वृद्धि होती रही तो उपभोक्ताओं का रुझान प्रभावित हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन का एक बड़ा हिस्सा CNG पर निर्भर है। ऐसे में कीमतों में वृद्धि का असर केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों यात्रियों की दैनिक यात्रा लागत पर भी पड़ सकता है। कई लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो परिवारों के मासिक खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाएगी।

फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर सरकार और गैस कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतों को स्थिर करने के लिए कोई राहतभरा फैसला लिया जा सकता है। हालांकि ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें और डॉलर की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक ईंधन की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल दिखाई देता है।

CNG की कीमतों में लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक अस्थिरता का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर तेजी से पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और कंपनियां आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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