June 10, 2026

धरती आबा को नमन: झारखंड ने याद किया अपना अमर नायक

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रांची। आदिवासी स्वाभिमान, संघर्ष और आज़ादी की लड़ाई के महानायक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर सोमवार को पूरा झारखंड श्रद्धा से नतमस्तक दिखाई दिया। राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं ने रांची स्थित बिरसा स्मृति स्थल पहुंचकर धरती आबा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक हैं। उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है।

महज 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजी शासन के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागृति की ऐसी अलख जगाई, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। 9 जून 1900 को रांची जेल में उनका निधन हुआ था, लेकिन उनका संघर्ष और बलिदान उन्हें अमर बना गया।

पुण्यतिथि के मौके पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्मृति स्थलों पर लोगों का तांता लगा रहा और धरती आबा के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया।

भगवान बिरसा मुंडा का नाम केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के इतिहास में स्वाभिमान, साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के रूप में दर्ज है। उनकी पुण्यतिथि हर वर्ष नई पीढ़ी को यह याद दिलाती है कि अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प कितना महत्वपूर्ण होता है।