दुनिया की दिग्गज दवा कंपनी पर साइबर हमला! 1.3TB डेटा चोरी का दावा, ₹214 करोड़ की फिरौती ठुकराते ही हैकर्स की खुली धमकी
Ozempic और Wegovy बनाने वाली कंपनी Novo Nordisk पर बड़ा साइबर अटैक, ड्रग्स डेटा से लेकर AI सिस्टम तक निशाने पर
हैकर्स का आरोप है कि कंपनी द्वारा रकम देने से इनकार करने के बाद अब वे चोरी किए गए डेटा के कुछ हिस्सों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं।
हैकर समूह के मुताबिक चोरी हुए डेटा में:
कंपनी का सोर्स कोड
जारी और विकासाधीन दवाओं की गोपनीय जानकारी
क्लीनिकल ट्रायल डेटा
कर्मचारियों, डॉक्टरों और मरीजों से जुड़ी जानकारी
AI मॉडल और आंतरिक तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं।
हालांकि Novo Nordisk ने कहा है कि उसे ऑनलाइन प्रकाशित किए गए दावों की जानकारी है और वह संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके प्रमुख प्लेटफॉर्म सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, FulcrumSec ने दावा किया कि वह करीब दो महीने तक कंपनी के नेटवर्क के अंदर मौजूद रहा और बड़ी मात्रा में संवेदनशील जानकारी हासिल की। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में फार्मा सेक्टर पर हुए सबसे बड़े साइबर हमलों में से एक हो सकता है।
क्यों है मामला गंभीर?
Novo Nordisk दुनिया की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक है। यदि हैकर्स का दावा सही साबित होता है, तो इससे दवा अनुसंधान, मरीजों की गोपनीयता और कंपनी की बौद्धिक संपदा को बड़ा खतरा हो सकता है।
5 बड़ी बातें
Novo Nordisk पर 1.3TB डेटा चोरी का दावा
हैकर्स ने मांगी ₹214 करोड़ की फिरौती
कंपनी ने भुगतान से किया इनकार
ड्रग रिसर्च, AI डेटा और सोर्स कोड चोरी होने का दावा
डेटा बेचने की धमकी के बाद वैश्विक साइबर सुरक्षा जगत में हड़कंप
बड़ी बात
यह सिर्फ एक डेटा चोरी का मामला नहीं है। अगर दवा कंपनियों का रिसर्च और मरीजों का संवेदनशील डेटा साइबर अपराधियों के हाथ लगने लगे, तो इसका असर पूरी वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है।
