कोटा में राहुल गांधी की हुंकार से पहले सियासी संग्राम! पोस्टर हटाने से लेकर छात्रों पर दबाव के आरोप, कांग्रेस-BJP आमने-सामने
‘छात्रों की गूंज’ रैली से पहले राजस्थान का राजनीतिक पारा हाई, राहुल के मंच से उठेंगे पेपर लीक और बेरोजगारी के सवाल
दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की राजनीतिक सहानुभूति बटोरने की रणनीति बताया है। लेकिन रैली शुरू होने से पहले ही जिस तरह आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हुआ है, उसने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
दरअसल, राहुल गांधी की यह रैली ऐसे समय में हो रही है जब देशभर में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दे युवाओं के बीच बड़ी चिंता बने हुए हैं। कोटा, जिसे देश की ‘कोचिंग कैपिटल’ कहा जाता है, इन मुद्दों को उठाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के प्रचार से भाजपा घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन द्वारा पोस्टर और होर्डिंग हटाए जा रहे हैं तथा विभिन्न संस्थानों पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में रैली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि कोटा से छात्र आंदोलन की शुरुआत अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश है।
राहुल गांधी ने भी अपने सोशल मीडिया संदेशों में युवाओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया है कि मौजूदा व्यवस्था ने छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को निराश किया है। उन्होंने पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में कथित विफलताओं, बढ़ती शिक्षा लागत और सीमित रोजगार अवसरों को प्रमुख मुद्दा बताया।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस नेताओं से सबूत पेश करने की मांग की और कहा कि बिना अनुमति लगाए गए कई होर्डिंग्स को नियमों के तहत हटाया गया है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी की रैली को लेकर किसी तरह की प्रशासनिक बाधा नहीं डाली जा रही।
क्यों खास है यह रैली?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक जनसभा नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत मानी जा रही है। लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी लगातार युवाओं, छात्रों और रोजगार के मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कोटा का चयन भी रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि यहां हर साल लाखों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता का मुद्दा यहां सीधे छात्रों की भावनाओं से जुड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या राहुल गांधी की कोटा रैली युवाओं की नाराजगी को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे पाएगी, या यह सिर्फ एक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन बनकर रह जाएगी?
बड़ी बात
रैली शुरू होने से पहले ही जिस तरह पोस्टर, परमिशन और राजनीतिक दबाव को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसने साफ कर दिया है कि कोटा की यह सभा सिर्फ छात्रों की आवाज नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी विमर्श की दिशा भी तय कर सकती है।
