June 17, 2026

राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों का खेल? SIT की एंट्री से मचा हड़कंप, दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी ने बढ़ाया रहस्य

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आस्था के सबसे बड़े केंद्र पर उठे गंभीर सवाल, करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी की जांच में जुटी सरकार

अयोध्या: करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक राम मंदिर को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करोड़ों रुपये की दान राशि में गड़बड़ी हुई है। मामला इतना गंभीर हो गया कि उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष जांच दल (SIT) गठित करनी पड़ी। अब SIT लगातार मंदिर परिसर में जांच कर रही है और हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस तेज हो गई।

हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रस्ट का कहना है कि दान राशि का नियमित ऑडिट होता है और अब तक किसी प्रकार की अनियमितता सामने नहीं आई है। ट्रस्ट के अनुसार बैंक और अधिकृत एजेंसियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संचालित की जाती है।

लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। अयोध्या के एक भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंदिर को मिली दान राशि और उसके उपयोग का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग कर दी। इसके बाद विवाद और गहरा गया। पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह और वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार के बयानों ने भी इस मुद्दे को और सुर्खियों में ला दिया।

सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जांच के दौरान मंदिर से जुड़े दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से एक कर्मचारी के घर से लगभग 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बरामद रकम का कथित दान घोटाले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। लेकिन इस बरामदगी ने जांच को नया मोड़ जरूर दे दिया है।

इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT ने मंदिर परिसर में कई घंटों तक मैराथन जांच की। जांच टीम ने दान संग्रह, नकदी गिनती, कर्मचारियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड, CCTV निगरानी प्रणाली और बैंक में जमा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की। बताया जा रहा है कि टीम कई कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ भी कर चुकी है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग को लेकर जनहित याचिका भी दायर की गई है। वहीं, भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग उठाई गई है।

क्यों है मामला इतना बड़ा?

राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। जनवरी 2024 में उद्घाटन के बाद मंदिर में दान की अभूतपूर्व वर्षा हुई। पहले ही दिन श्रद्धालुओं ने लगभग 3.17 करोड़ रुपये का चढ़ावा चढ़ाया था। ट्रस्ट के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में मंदिर की कुल आय लगभग 327 करोड़ रुपये रही, जिसमें 153 करोड़ रुपये दान और 173 करोड़ रुपये ब्याज से प्राप्त हुए।

ऐसे में यदि दान राशि में किसी भी प्रकार की अनियमितता साबित होती है, तो इसका प्रभाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी पड़ेगा।

सबसे बड़ा सवाल

क्या राम मंदिर के चढ़ावे में वाकई कोई गड़बड़ी हुई है, या यह केवल आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी का मामला है? इसका जवाब अब SIT की जांच रिपोर्ट ही देगी। लेकिन इतना तय है कि करोड़ों रामभक्तों की नजरें अब इस जांच पर टिकी हुई हैं।

बड़ी बात

आस्था और पारदर्शिता— दोनों की परीक्षा एक साथ हो रही है। राम मंदिर से जुड़े इस विवाद का सच सामने आने तक देश की निगाहें अयोध्या पर टिकी रहेंगी।

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