G7 में रूस पर बड़ा प्रहार, AI पर भी मंथन! दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं की बैठक में बने कई अहम फैसले
यूक्रेन को मिला खुला समर्थन, रूस पर और कड़े प्रतिबंध की तैयारी; AI और सोशल मीडिया के खतरों पर भी वैश्विक चिंता
G7 देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दोहराया। साथ ही रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए तेल और गैस क्षेत्र समेत नए प्रतिबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। यह संदेश ऐसे समय आया है जब यूक्रेन युद्ध को चार साल से अधिक समय हो चुका है और पश्चिमी देश रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
AI बना वैश्विक चिंता का नया विषय
इस बार G7 सम्मेलन में युद्ध और भू-राजनीति के साथ-साथ AI भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रहा। OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन, Anthropic के CEO डारियो अमोदेई और यूरोपीय AI कंपनी Mistral के संस्थापक आर्थर मेंश जैसे दिग्गज टेक लीडर्स ने भी नेताओं के साथ चर्चा में हिस्सा लिया।
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही AI तकनीक के फायदे और संभावित खतरों को लेकर नेताओं ने विचार-विमर्श किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव, गलत सूचना, साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा भी चर्चा के केंद्र में रहे।
रूस पर दबाव, ईरान समझौते का स्वागत
G7 नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते का स्वागत किया और उसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग की इच्छा जताई। नेताओं ने यह भी कहा कि दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति के लिए केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऊर्जा मार्गों के विविधीकरण और भंडारण बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
पीएम मोदी ने उठाया भारत का मुद्दा
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से वैश्विक व्यापार पर पड़े असर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार में रुकावट का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या रूस पर नए प्रतिबंध युद्ध खत्म कराने में मदद करेंगे, या दुनिया को एक लंबी भू-राजनीतिक खींचतान के लिए तैयार रहना होगा?
बड़ी बात
G7 का यह सम्मेलन सिर्फ कूटनीति का मंच नहीं रहा, बल्कि यह संकेत भी दे गया कि आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियां सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि AI, साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रभाव भी होंगी।
