June 21, 2026

‘हिंदू बहुसंख्यक नहीं’ बयान पर बवाल, छिड़ी नई बहस

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देश में धार्मिक जनसांख्यिकी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य Maulana Sajjad Nomani के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि भारत में हिंदुओं को बहुसंख्यक नहीं माना जाना चाहिए और पारंपरिक आंकड़ों के आधार पर बनाई गई यह धारणा वास्तविक सामाजिक संरचना को पूरी तरह नहीं दर्शाती।

मौलाना सज्जाद नोमानी ने कहा कि उन्होंने पिछले तीन दशकों में देशभर की यात्राओं के दौरान लोगों की धार्मिक पहचान, जनजातीय परंपराओं, जातीय समूहों और विभिन्न आस्था प्रणालियों का अध्ययन किया है। उनके अनुसार, यदि विभिन्न समुदायों और पहचान समूहों को अलग-अलग देखा जाए, तो भारत की जनसांख्यिकीय तस्वीर सामान्य तौर पर समझे जाने वाले स्वरूप से भिन्न दिखाई देती है। उन्होंने अपने दावे को लेकर सार्वजनिक रूप से दृढ़ रुख भी जताया।

हालांकि, उनके इस बयान ने तुरंत विवाद का रूप ले लिया। आलोचकों का कहना है कि भारत की आधिकारिक जनगणना और सरकारी आंकड़े देश की धार्मिक संरचना को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, इसलिए इस प्रकार के दावों से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि नोमानी का बयान सामाजिक पहचान और जनसांख्यिकीय वर्गीकरण पर व्यापक चर्चा की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धर्म, जाति, जनजातीय पहचान और जनसंख्या आंकड़ों से जुड़ी बहस को केंद्र में ला दिया है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।