झारखंड में जेटेट (JTET) परीक्षा को लेकर चल रहा भाषा विवाद अब और तेज हो गया है। भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उठे विरोध के बीच राज्य सरकार ने अब इस मामले को सुलझाने के लिए पांच मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी तय करेगी कि किन भाषाओं को जेटेट परीक्षा में शामिल किया जाए और किन्हें नहीं।
दरअसल, हाल ही में जारी जेटेट नियमावली में कई क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने पर छात्रों, शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए थे। सबसे ज्यादा विरोध पलामू, गढ़वा और संथाल परगना क्षेत्र से सामने आया, जहां बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलते हैं। लोगों का कहना है कि इन भाषाओं को हटाना स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय है।
सरकार द्वारा गठित इस कमेटी की कमान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को सौंपी गई है। समिति में दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद, सुदिव्य कुमार और संजय यादव जैसे मंत्री भी शामिल हैं। यह पैनल जिलावार भाषाई स्थिति का अध्ययन करेगा और फिर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
इस पूरे विवाद का असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, क्योंकि लगभग 10 साल बाद होने जा रही जेटेट परीक्षा पहले ही देरी का सामना कर रही है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि भाषा विवाद के कारण परीक्षा प्रक्रिया लगातार उलझती जा रही है और छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो चुकी है। विपक्ष इसे सरकार की “भाषाई असंतुलन” वाली नीति बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए संतुलित फैसला लिया जाएगा। अब सबकी नजर इस मंत्री समूह की रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका कितनी मजबूत होगी।