Ranchi/Jharkhand : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन की कार्यवाही राज्य की महत्वपूर्ण जलापूर्ति परियोजनाओं और लोकतांत्रिक मर्यादा के मुद्दों पर केंद्रित रही। एक ओर जहाँ जमशेदपुर की मानगो पेयजल परियोजना और धनबाद जलापूर्ति योजना में वर्षों की देरी को लेकर विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरा, वहीं दूसरी ओर सदन में असंसदीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ।
मानगो में 2009 की योजना अब तक अधूरी, सरयू राय ने जताई नाराजगी
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने मानगो पेयजल परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तीखे सवाल करते हुए पूछा कि वर्ष 2009 में शुरू हुई यह योजना आखिर 2026 तक भी पूर्ण क्यों नहीं हो सकी?
विधायक सरयू राय का आरोप
उपेक्षा और लापरवाही : 2019 से 2024 के बीच परियोजना की भारी अनदेखी हुई।
अधूरा बुनियादी ढांचा : जलमीनारों का काम अधूरा है और इंटेक वेल में जमी बालू की सफाई तक नहीं हुई।
एमजीएम को जलापूर्ति : योजना खुद पानी देने में सक्षम नहीं है, फिर भी टैंकरों के माध्यम से एमजीएम अस्पताल को रोजाना 72 हजार लीटर पानी भेजा जा रहा है।
मंत्री का आश्वासन : जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि केंद्र सरकार से एनओसी मिलने में देरी के कारण काम प्रभावित हुआ। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि मार्च 2026 तक इस योजना को पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने फेज-2 के निर्माण को जरूरी बताया।
धनबाद जलापूर्ति : 500 करोड़ का ठेका और कंपनी की कार्यशैली पर सवाल
धनबाद की जलापूर्ति योजना का मुद्दा उठाते हुए विधायक अरुप चटर्जी ने ‘श्री राम ईपीसी’ कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये की इस परियोजना का एक भी कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ और कंपनी के किसी अन्य फर्म के साथ विलय (मर्ज) होने से स्थिति और जटिल हो गई है। विभागीय मंत्री योगेंद्र महतो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने का आश्वासन दिया।
असंसदीय भाषा पर हंगामा, भाजपा विधायकों का वेल में प्रदर्शन
सदन के भीतर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब विधायक नीरा यादव ने विधायक समीर मोहंती के एक बयान में ‘असंसदीय भाषा’ के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके विरोध में भाजपा विधायक वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे।
अध्यक्ष ने किया हस्तक्षेप : विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाने (स्पंज करने) का आदेश दिया।
संसदीय कार्य मंत्री की माफी : माहौल शांत कराने के लिए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पूरे सदन की ओर से खेद प्रकट किया और विधायकों से मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे : अभियंताओं के वेतन और पदस्थापन पर चर्चा
सदन में विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने पथ निर्माण विभाग में सहायक अभियंताओं (AE) के पदस्थापन और वेतन भुगतान में हो रही विसंगतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2007 और 2022 बैच के अभियंताओं के वेतन विनियमन पर विस्तृत जानकारी मांगी। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने जवाब दिया कि यह मामला वर्तमान में प्रक्रियाधीन है और नियमानुसार समीक्षा की जा रही है।