May 27, 2026

झारखंड में अब ‘स्नेकबाइट’ पर सख्ती, सांप काटने के हर केस की देनी होगी जानकारी

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झारखंड सरकार ने सांप काटने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में स्नेकबाइट यानी सांप के काटने के मामलों को “नोटिफाएबल डिजीज” घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों को भी हर स्नेकबाइट केस और उससे हुई मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा।

दरअसल, झारखंड के ग्रामीण और जंगल से जुड़े इलाकों में हर साल बारिश और गर्मी के मौसम में सांप काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने या झाड़-फूंक के भरोसे रहने के कारण लोगों की जान तक चली जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।

नई व्यवस्था के तहत सभी स्वास्थ्य संस्थानों को स्नेकबाइट से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड रखना होगा और उन्हें स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि राज्य के कौन-कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और वहाँ एंटी स्नेक वेनम (ASV) व इलाज की बेहतर व्यवस्था की जा सकेगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता बढ़ाने और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की तैयारी है, ताकि सांप काटने के बाद लोग तुरंत अस्पताल पहुंचें और गलत इलाज से बचें।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर इलाज मिलने से ज्यादातर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में झारखंड सरकार का यह फैसला आने वाले समय में हजारों लोगों के लिए राहत साबित हो सकता है।