June 18, 2026

किताबों में 1600 गलतियां, बच्चों का भविष्य दांव पर? ओडिशा के पाठ्यपुस्तक विवाद ने खड़े किए बड़े सवाल

books-generic_650x400_61467521389

भुवनेश्वर: स्कूल की किताबें बच्चों के भविष्य की नींव मानी जाती हैं, लेकिन अगर उन्हीं किताबों में सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों गलतियां हों तो क्या होगा? ओडिशा में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राज्य की कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में करीब 1600 त्रुटियां मिलने के बाद सरकार को जांच समिति गठित करनी पड़ी है।

मामला तब सामने आया जब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने नई किताबों में कई गंभीर गलतियों की ओर ध्यान दिलाया। इनमें वर्तनी संबंधी त्रुटियों से लेकर ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों की गलत प्रस्तुति तक शामिल है। कुछ मामलों में प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम गलत लिखे गए, तो कहीं ओडिशा विधानसभा की जगह कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर प्रकाशित कर दी गई। इतना ही नहीं, ओडिशा की प्रसिद्ध नियामगिरि पहाड़ियों को झारखंड में स्थित बताया गया।

इन खुलासों के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्ष ने इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जिन किताबों से बच्चों को ज्ञान मिलना चाहिए, उनमें इतनी बड़ी संख्या में गलतियां मिलना बेहद चिंताजनक है।

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति के गठन का आदेश दिया है। समिति को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किताबों में मौजूद सभी त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए।

गौरतलब है कि ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप तैयार की गई थीं और नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रकाशित की गई हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में गलतियों का सामने आना शिक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है।

शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकें केवल पढ़ाई का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे बच्चों के सोचने और समझने का आधार भी बनाती हैं। ऐसे में तथ्यात्मक और भाषाई त्रुटियां न केवल भ्रम पैदा कर सकती हैं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर सकती हैं।

अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी चूक हुई कैसे, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

You may have missed