पत्तों से बदली तकदीर! राजनगर के कुमडीह में शुरू हुई पेपर प्लेट यूनिट, अब गांव की महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
सरायकेला-खरसावां: कभी जंगलों से पत्ते चुनकर मामूली आमदनी करने वाले ग्रामीण अब इन्हीं पत्तों के जरिए अपनी आर्थिक तस्वीर बदलने की तैयारी में हैं। राजनगर प्रखंड के कुमडीह गांव में शुरू हुई पेपर प्लेट निर्माण इकाई न केवल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का नया द्वार खोल रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जंगलों से मिलने वाले संसाधनों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब उन्हीं संसाधनों को मूल्य संवर्धन के साथ बाजार तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि गांव में ही रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पलायन रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है।
इस यूनिट में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। प्लेट निर्माण, पैकेजिंग और विपणन जैसे कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे वे केवल श्रमिक नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता की नई पहचान बनकर उभरेंगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग के बीच प्राकृतिक पत्तों से बने उत्पादों की मांग देशभर में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कुमडीह की यह छोटी शुरुआत भविष्य में बड़े उद्योग का रूप ले सकती है।
गांव के लोगों को उम्मीद है कि यह यूनिट सिर्फ प्लेटें नहीं बनाएगी, बल्कि कई परिवारों के सपनों को भी नया आकार देगी। राजनगर का कुमडीह अब आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास की एक नई मिसाल बनने की ओर बढ़ रहा है।
