जम्मू-कश्मीर मुद्दे को लेकर चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बयान के बाद एक बार फिर दक्षिण एशिया की कूटनीति और सीमा विवाद चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif 23 से 26 मई तक चीन दौरे पर हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया गया, जिस पर भारत ने तुरंत आपत्ति जताई।
भारत के विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर किसी तीसरे देश की टिप्पणी पूरी तरह अस्वीकार्य है। सरकार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है और ऐसे में उसकी ओर से शांति और क्षेत्रीय स्थिरता की बातें करना विरोधाभासी लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं हो सकती।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग चीन-पाकिस्तान के बयान और भारत की प्रतिक्रिया को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारत की आगे की कूटनीतिक रणनीति पर सबकी नजर बनी रहेगी।