मंत्री जी, ये कैसा विकास? सड़क के बिना ‘खटिया’ पर एम्बुलेंस का सफर। विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के क्षेत्र में विकास के दावों की निकली हवा, गर्भवती महिला को चारपाई पर ढोया।
झारखंड के गिरिडीह जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने विकास और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन क्षेत्र में सड़क और एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को एक गर्भवती महिला को खाट पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद लोग हैरानी और नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की। लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने और खराब रास्तों के कारण एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने महिला को खाट पर लिटाया और कई किलोमीटर तक पैदल सफर कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
इस दौरान ग्रामीणों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक हालात नहीं बदले। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है।
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण विकास के दावे करती है, वहीं ऐसी घटनाएं जमीनी हकीकत की अलग तस्वीर पेश करती हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय पर सड़क और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध होती, तो गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को इस तरह जान जोखिम में डालकर सफर नहीं करना पड़ता। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है।
फिलहाल यह घटना सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित हैं, जहां मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए “खाट एंबुलेंस” का सहारा लेना पड़ता है।