June 18, 2026

कोयले का नया बादशाह! 25 साल में ₹13.27 लाख करोड़ की कमाई का रास्ता, BJP शासित राज्यों के टेंडरों में अदानी का दबदबा

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नई दिल्ली: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव चुपचाप आकार ले रहा है। एक दशक तक लंबी अवधि के कोयला आधारित बिजली समझौतों से दूरी बनाने के बाद देश ने 2024 में फिर से ऐसे अनुबंधों की राह पकड़ी, और इस वापसी का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है अदानी समूह।

एक हालिया खोजी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच जारी किए गए दीर्घकालिक कोयला बिजली खरीद समझौतों (PPA) में अदानी समूह ने ऐसी बढ़त हासिल की है, जिससे उसे अगले 25 वर्षों में अनुमानित ₹13.27 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व मिल सकता है। खास बात यह है कि इन अनुबंधों का बड़ा हिस्सा उन राज्यों से आया है जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें सत्ता में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2024 से जनवरी 2026 के बीच कुल 12 बड़े दीर्घकालिक बिजली खरीद टेंडर जारी किए गए। इनमें से आठ टेंडर BJP शासित राज्यों द्वारा निकाले गए और अदानी समूह ने सभी में या तो सीधे जीत हासिल की या फिर विजेता कंपनियों में शामिल रहा। दूसरी ओर, विपक्ष शासित राज्यों में तस्वीर अलग दिखाई दी, जहां समान प्रकृति के टेंडरों में अदानी समूह को सीमित सफलता मिली।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के बावजूद उनकी अनियमित उपलब्धता के कारण सरकारें अब फिर से कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर भरोसा बढ़ा रही हैं। इसी रणनीति के तहत केंद्र सरकार ने 2031-32 तक 80 गीगावाट अतिरिक्त तापीय बिजली क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जिसे बाद में और बढ़ाने की चर्चा भी सामने आई है।

रिपोर्ट में महाराष्ट्र, बिहार, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया गया है। कहीं टेंडर की शर्तों पर सवाल उठे, तो कहीं परियोजनाओं को लेकर विशेष रियायतों की चर्चा हुई। हालांकि अदानी समूह ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने सभी अनुबंध पूरी तरह पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और कानूनी बोली प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किए हैं। कंपनी का कहना है कि किसी राज्य की राजनीतिक विचारधारा या सरकार का उसकी भागीदारी से कोई संबंध नहीं है।

मामला केवल कारोबार का नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा नीति से भी जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के बिजली खरीद समझौते राज्यों को दशकों तक तय दरों पर बिजली खरीदने के लिए बाध्य कर देते हैं। यदि भविष्य में बिजली की मांग अनुमान से कम रहती है, तो इसका आर्थिक बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

इस बीच, अदानी समूह अपने निवेशकों से खुलकर कह चुका है कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार का दौर अभी शुरू हुआ है और निजी क्षेत्र के लिए इसमें बड़े अवसर मौजूद हैं। ऐसे में ऊर्जा क्षेत्र की अगली बड़ी कहानी शायद केवल बिजली उत्पादन की नहीं, बल्कि उस कारोबारी दौड़ की होगी जिसमें भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट समूहों में से एक ने मजबूत बढ़त बना ली है।

अब सवाल यह है कि क्या यह सफलता केवल प्रतिस्पर्धी क्षमता का परिणाम है, या फिर आने वाले समय में इन टेंडरों और उनकी शर्तों पर और भी गहन जांच होगी? फिलहाल इतना तय है कि भारत के कोयला ऊर्जा बाजार में अदानी समूह की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

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